गुरुवार, 4 जनवरी 2024

ठंड की ठिठुरन, बारिश, कोहरा और मेरी यात्रा

 वैसे तो अब तक मेरे कई सफर चुनौतीपूर्ण रहे हैं लेकिन लम्बे समय बाद एक यात्रा ने जमकर इम्तिहान लिया। यह यात्रा थी यूपी के फतेहपुर की, जहां एक ट्रेनिंग के सिलसिले में मुझे जाना था। यह यात्रा मुश्किल एक और वजह से हो जाती है और वह है हिट एंड रन को लेकर प्रस्तावित नया कानून, जिसके विरोध में ट्रक ड्राइवर्स की हड़ताल के बाद रोडवेज बस के भी पहिये थम गये। नतीजन मुझे ट्रेन से यात्रा करनी पड़ी। ऐसा नहीं है कि मुझे रेल यात्रा पसंद नहीं है, लेकिन फतेहपुर के लिए सीधी रेल सेवा कम है। इसलिए यूपी परिवहन से सफर करना मुनासिब रहता है। 

आप कह सकते हैं कि मेरा इससे क्या लेना-देना, मैं क्यूं पढ़ूं? सही भी है, पर मुझे लगा कि इस पर लिखना चाहिए और इस दौरान मैंने जो गलतियां की हैं, वह आप न दोहराएं।



चलिए इस यात्रा के बारे में थोड़ा विस्तार से बात करते हैं। दरअसल बजाज अलियांज लाइफ के साथ मैं कंसल्टेंट ट्रेनर के तौर पर जुड़ा हूं। मेरे पास एक रीजन लखनऊ अपकंट्री जिसमें 7 ब्रांचेस आती हैं, इनमें एक फतेहपुर भी है। लखनऊ के अलावा सीतापुर, रायबरेली और लालगंज तो मैं कई बार जा चुका हूँ ट्रेनिंग के सिलसिले में लेकिन अब तक फतेहपुर नहीं गया। कमोबेश सभी ब्रांचों में महीने की शुरुआत में इंश्योरेंस कंसल्टेंट की मीटिंग बुलाई जाती है। फतेहपुर के ब्रांच मैनेजर से मैंने शेड्यूल पूछा और बुलाने की गुजारिश की तो वह सहर्ष तैयार हो गए। मैंने भी जाने का कमिटमेंट कर दिया। इस सम्बंध में मैंने अपने रीजनल ट्रेनिंग मैनेजर व रीजनल हेड को जानकारी दी। शुभचिंतक होने के नाते सबने हड़ताल और मौसम का हवाला दिया पर मेरा जोश देखकर मान गए। अब समस्या थी कि जाया कैसे (परिवहन) जाए? क्योंकि बसें तो बंद थीं लिहाज़ा तय हुआ कि ट्रेन से जाऊंगा।

ऑफिस से घर निकला तो बाइक रिजर्व में लग चुकी थी जबकि सुबह मुझे निकलना था। रास्ते मे पेट्रोल पंप लर लम्बी-लम्बी लाइन देखकर घर जाना ही उचित समझा। बाइक के पेट्रोल की टंकी खोलकर देखा तो सुकून मिला। आश्वस्त हुआ कि चारबाग तक पहुंच जाएंगे। घर में बताया कि तीन जनवरी को फतेहपुर जाना है। गोमती एक्सप्रेस सुबह 5:45 पर थी, देर रात बॉस (आरटीएम) का फोन आया, कहा कि हर हाल में सुबह 5:30 बजे तक स्टेशन पहुंच जाना बेहतर रहेगा।

पत्नी ने रात में सब्जी काट ली, ताकि सफर के लिए खाना के जा सकूं। सोने से पहले मैंने कानपुर जाने वाली ट्रेनों की डिटेल खंगाली, तय किया कि अब गोमती से ही जाना है। इस बीच आईआरसीटीसी का पुराना अकाउंट भी सक्रिय कर लिया जरूरत न होने की वजह से जिसे मैं भुल चुका था। लम्बे समय बाद खुद ही अपना टिकट बुक किया। हालांकि, पेटीएम से बुक करने पर 75 रुपए का टिकट 113 रुपए में पड़ा। आमतौर पर रात 9:30 बजे सो जाता हूं, पर आज एक घंटा लेट था। निश्चिंत था क्योंकि पत्नी से सुबह 4:30 बजे नींद से जगाने को कहा था, जो रोजाना हमसे पहले ही उठती है। आज उसने 15 मिनट पहले ही उठा दिया था। आनन-फानन में सेविंग की, क्यूंकि यह काम मैं रविवार, बुधवार और शुक्रवार को ही करता हूं। इस सबके चलते टाइम अपनी स्पीड से भागा जा रहा था। श्रीमती जी ने टिफिन पैक कर दिया था। जब तक चाय पी उन्होंने बैग भी सेट कर दिया। यात्रा का असली ट्विस्ट तो यहीं से शुरू हुआ।

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गेट खोलकर बाहर देखा तो रोंगटे खड़े हो गए। भयंकर कोहरा पड़ रहा था। फिलहाल जाना तो था ही। कोहरा इतना था कि बार-बार चश्मे के ग्लास साफ करने पड़ रहे थे। स्टैंड पर बाइक खड़ी करने और स्टेशन तक पहुंचते-पहुंचते 5:40 बज चुके थे, पर निशिन्त था कि टिकट लेने का चककर नहीं है। रेलवे का इन्क्वायरी बोर्ड देखा तो पता चला कि ट्रेन करीब ढाई घंटे बाद छूटने वाली थी। उससे ज्यादा कोफ्त खुद पर हुई कि निकलने से पहले एसएमएस क्यों नहीं देखा, तीन बजे ही रेलवे ने सूचित कर दिया था कि आपकी ट्रेन पौने छह पर नहीं बल्कि 8.20 पर छूटेगी। अब मरता क्या न करता वहीं बैठा रहा। बैठे-बैठे फेसबुक और इंटाग्राम पर सेल्फी पोस्ट भी कर दी। 7 बजे मेमू निकलने वाली थी उसी से कानपुर तक जाने का निर्णय लिया, जबकि पिछले हफ्ते ही कानपुर गयी पत्नी ने इस ट्रेन को बैलगाड़ी की संज्ञा दी थी। ट्रेन तय समय पर रवाना हुई तो काफी खुश थी। मेरे साथ जो सहयात्री बैठे थे। एक ऊंघ रहा था। दो पॉलिटिकल बहस में व्यस्त थे। न चाहकर मुझे भी उनकी सहमति-असहमति पर सिर हिलाना पड़ रहा था। उनको हंसता देखकर बीच-बीच में झूठी स्माइल मैं भी मार देता था। रास्ते में बारिश भी खूब हो रही थी, जिसके चलते ठंड सिहरा रही थी।

उन्नाव तक तो ट्रेन सही समय पर पहुंची लेकिन वहां से लखनवी अंदाज़ से दूसरी गाड़ियों को पहले आप-पहले आप की तर्ज पर पास देने लगी। इतने से भी काम नहीं चला तो आउटर पर खड़ी हो गयी। मेरे अलावा अब अन्य सहयात्रियों का धैर्य जवाब दे रहा था। लोग पैदल ही गंतव्य की ओर निकलने लगे। बारिश भी हो रही थी। मैं इस उहापोह में था कि ट्रेन चलने का इंतज़ार करूँ या पैदल जाऊं। करीब 20 मिनट बाद मैंने भी पैदल जाने का निर्णय लिया। बारिश थम गई थी, लेकिन अचानक मेरा पैर फिसला, बैलेंस बिगड़ते ही मैँ पटरी के बीच पड़ी गिट्टियों पर गिर गया, लेकिन फुर्ती में उठ खड़ा हुआ। चोट की वजह से घुटना दर्द कर रहा था। एकबारगी ख्याल आया कि चलो कानपुर से घर लौट चलते हैं। फिर मन ने कहा नहीं हमें फतेहपुर जाना चाहिए। क्योंकि फतेहपुर के ब्रांच हेड लगातार मेरी यात्रा की जानकारी ले रहे थे। वैसे भी कमिटमेंट नाम की कोई चीज होती है।

फिलहाल पटरियां क्रॉस कर मैं बाहर आ चुका था। बाहर का नजारा देखकर फैसले पर अफसोस हुआ। वहां कोई वाहन नही था और रोड पर पानी भरा था। एक दो ई-रिक्शा आ भी रहे थे जो देखते ही भर जा रहे थे। सोचा कि पैदल ही चलते है इसी बहाने स्टेप्स भी कवर हो जाएंगे। आपको बता दें कि मैंने तय किया है कि 40 हार्ट प्वॉइंट्स के साथ रोजाना 10 हजार स्टेप चलूं। इसकी दो वजह हैं। एक स्वस्थ रहूं दूसरा अपनी हेल्थ पॉलिसी से हेल्थ रिटर्न (प्रीमियम) ले सकूं। मैं बढ़ता जा रहा था। रास्ते में जगह-जगह भरा पानी सरकार के गड्ढामुक्त दावों की पोल कह रहा था। आधी दूर ही पहुंचे होंगे कि मेरी ट्रेन सीटी बजाकर मुझे चिढ़ाती हुई निकल गयी। बारिश में भीगने से बचने के लिए तेज-तेज चल रहा था। माथे पर पसीना छलछला आया था जबकि जूतों के अंदर भीगे मोजे उंगलियों को ठिठुरा रहे थे।

उस समय कानपुर से फतेहपुर के लिए कोई ट्रेन नहीं थी। ब्रांच मैंनेजर की सलाह पर बस से जाना तय किया। ई-रिक्शा से टाटमिल चौराहा पहुंचा, जहाँ फतेहपुर की बस खड़ी दिखी तो चैन मिला। कहते हैं कि भूखे भजन न होहिं गोपाला.. बस में बैठते ही सबसे पहला काम ये किया कि पत्नी के बनाये हुए पराठे और फूल गोभी की सब्जी खाकर पेट की भूख शांत की। क्योंकि मेरी आदता 10 बजे तक खाना खा लेने की है।



11 बजे पहुंचना था, पर 12 बजे फतेहपुर पहुंच पाया। बस स्टैंड से सेल्स मैनेजर सुयस जी मुझे ऑफिस तक ले गये जहां मेरे स्टूडेंट जिनमें कुछ सीनियर सिटीजन वह गृहणियां भी थीं जो मेरा इंतजार कर रहे थे। सभी से अभिवादन का आदान-प्रदान हुआ। ब्रांच हेड से मिला जो क्लास में थे, मैं भी उसमें शामिल हो गया। ट्रेनिंग सेशन करीब 4 बजे तक चला। इसके बाद शाम को स्थानीय रेस्टोरेंट में फाइनेंशियल एडवाइजर्स व सेल्स मैनेजर्स के साथ डिनर था। बेहतरीन आयोजन था। ब्रांच हेड ने मेहमाननवाजी का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।

आधी रात से ठीक दो घंटे पहले अचानक तय हुआ कि मुझे रात में ही लखनऊ के लिए निकलना है। यात्रा का असली ट्विस्ट तो यहां से शुरू हुआ। लखनऊ आने के दो रास्ते थे। एक लालगंज, बछरावां होते हुए और दूसरा कानपुर से घूमते हुए लखनऊ आना। इत्तेफाक से एक बस मिल गई जो लखनऊ के लिए निकल रही थी। मेरी तो बांछें खिल गईं। चट से उसमें जा बैठा। अंदर छह या सात यात्री ही होंगे। बस ड्राईवर किसी से झगड़ रहा था। उसको गरियाते हुए गाड़ी लेकर निकला। अनुमान था कि दिन में बारिश हुई है इसलिए रात में कोहरा नहीं होगा, लेकिन मेरा मौसम विज्ञान गड़बड़ा गया। भयंकर कोहरा छाया हुआ था। ड्राइवर गाड़ी को ऐसे दौड़ा रहा था जैसे किसी कम्पटीशन में भाग ले रहा हो। इस दौरान दो-तीन अवसर ऐसे आये जब लगा कि गाड़ी अब लड़ी की तब। हम सभी अपने-अपने आगे वाली सीट को कसकर थामे हुए थे। लग रहा था कि आज कहीं न कहीं यह लड़ा ही देगा। कोहरे में वह गाड़ी को ऐसा दौड़ा रहा था कि जैसे उसने उल्लू वाला सूरमा लगा लिया हो।



कंडक्टर से आपत्ति जाहिर की तो ड्राइवर उससे भी लड़ने लगा। बातों ही बातों में पता चला कि रात को वह बस लेकर लखनऊ नहीं जाना चाहता था, पर उसे जबरन भेजा गया। इसके लिए वह सीनियर को खूब गालियां बक रहा था। कुछ हद तक उसका गुस्सा वाजिब भी था। फतेहुपर से लखनऊ के जाने वाले मुझे मिलाकर सिर्फ दो पैसेंजर ही थे और उस पर कोहरा भी भयंकर। इतना ही नहीं लखनऊ से उसे फिर 4 बजे सुबह फतेहपुर आना था। मैंने उसे खूब समझाया कि ड्राइवर साहब आपके और मेरे बच्चे हमारा इंतजार कर रहे हैं। आराम से चलिए क्योंकि दुर्घटना से देर भली। लेकिन वह अपनी धुन में गाड़ी दौड़ाता रहा। लालगंज के बाद हम सिर्फ दो यात्री ही बस में बचे थे, कुल मिलाकर चार लोग। गुरुबक्श गंज के अचानक उसने बस एक ढाबे पर खड़ी कर दी। कहा कि अब आगे नहीं जाऊंगा। उसने खाना खाया। चाय मैंने पी और उसे भी पिलाया। इस दौरान उसे समझाया कि भाई हम लोग तुम्हारे ही सहारे हैं। धमकाया भी कि अगर बस नहीं जाएगी तो अभी ट्विटर पर शिकायत करूंगा। आखिरकार वह चलने को तैयार हो गया। इस बार वह थोड़ा नॉर्मल था, इसकी वजह है कि उसे अहसास दिलाने में सफल रहा था कि मैं तुम्हारा दर्द समझ सकता हूं। 

इसके बाद वह नॉर्मल गति से बस चला रहा था। बछरावां से एनएच-31 पर गाड़ी आ चुकी थी। अब गाड़ी टकराने का डर नहीं था, डर था कि कहीं बस रोड से उतर न जाए। ड्राइवर सतर्क था, बावजूद कई बार ऐसी स्थिति आई कि जब बस रोड से किनारे की ओर भागी, लेकिन उसने कंट्रोल किया। पीजीआई पहुंचने पर मेरा सहयात्री उतर चुका था। अब पैसेंजर के नाम पर बस में मैं ही अकेला बचा था। करीब चार बजे हम चारबाग बस स्टैंड पहुंचे, वहां से बाइक ली और घर पहुंचा। सकुशल यात्रा के लिए मैंने ड्राइवर और ईश्वर को दिल से धन्यवाद किया और प्रण कर लिया कि इस तरह की यात्रा दोबारा नहीं करूंगा। आखिरी लाइन तक पढ़ने के लिए धन्यवाद। क्या मुझे ऐसा कुछ लिखना चाहिए या फिर नहीं, प्लीज बतायें जरूर। धन्यवाद।



गुरुवार, 5 नवंबर 2020

मां की कोख से अब संस्कारी बच्चे ही पैदा होंगे, BHU में गर्भवती को दी जा रही है Garbh Sanskar Therapy





- गर्भवती महिलाओं के लिए बीएचयू में शुरू हुई Garbh Sanskar Therapy

- गर्भवती महिलाओं को संगीत थेरेपी, वेद थेरेपी, ध्यान थेरेपी और पूजापाठ थेरेपी दी जा रही है

- प्रेग्नेंसी में जो भी मां ग्रहण करती है, शिशु भी उसे ग्रहण करता है, चाहे वह खाने की चीज हो या फिर संस्कार


लखनऊ. वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय का आयुर्वेद विज्ञान विभाग एक नई थेरेपी शुरू कर दी है। इस अनोखी थेरेपी के तहत अब गर्भ में बच्चों को संस्कार (Garbh Sanskar Therapy) की शिक्षा दी जा रही है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं को संगीत थेरेपी, वेद थेरेपी, ध्यान थेरेपी और पूजापाठ थेरेपी दी जा रही है। ताकि होने वाला शिशु जन्म के बाद समाज की कुरीतियों से लड़ने में खुद को सक्षम पाये। भजन और मंत्रोच्चार के बीच अल्ट्रासाउंड के माध्यम से गर्भवती महिलाओं के गर्भ में शिशु के हलचलों पर डॉक्टर नजर रख रहे हैं। इस थेरेपी से आने वाले रिजल्ट को देखकर डॉक्टर के साथ-साथ गर्भवती महिलाएं भी खुश हैं।

बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल के मेडिकल सुपरिण्टेंडेंट एसके माथुर कहते हैं कि आधुनिक अस्पतालों ने इसे बंद कर दिया है, लेकिन आयुर्विज्ञान में यह क्रिया पहले ही चली आ रही है। इसे हमारा विभाग फिर से शुरू कर रहा है। उन्होंने बताया कि विज्ञान कहती है कि गर्भस्त शिशु तीन महीने बाद हलचल करना शुरू कर देता है। प्रेग्नेंसी के दौरान जो भी मां ग्रहण करती है, शिशु भी उसे ग्रहण करता है। चाहे वह खाने की चीज हो या फिर संस्कार।

यह है पूरी प्रोसेस

इस अनोखी थेरेपी के बारे में आयुर्वेद विभाग की हेड डॉ. सुनीता सुमन बताती हैं कि गर्भवती महिलाओं को वेद पढ़ाए जा रहे हैं। साथ ही उन्हें पूजा-पाठ करने के लिए प्रेरित किया जाता है। उन्हें कर्णप्रिय संगीत भी सुनने को मिल रहा है और महापुरुषों के आचरण के बारे में भी सुनाया जा रहा है। वह बताती हैं कि बच्चे के हाव-भाव का पता लगाया जाता है कि वह वह खुश है या फिर डरा हुआ। उसे पांच वर्षों तक फालो किया जायेगा, जिससे उनके मानसिक और शारीरिक विकास का अध्ययन किया जा सके। डॉ. सुनीता सुमन ने कहा कि गर्भस्थ शिशु के लिए ऐसा माहौल किसी वरदान से कम नहीं साबित होगा। फिलहाल, यहां आने वाली महिलाओं को यह खासा पसंद आ रहा है। महिलाओं का कहना है कि उन्हें काफी सुकून मिल रहा है।

लखनऊ में भी कोर्स

'गर्भ संस्कार' पर सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स लखनऊ यूनिवर्सिटी में भी शुरू होने जा रहा है। पाठ्यक्रम में गर्भवती महिला को क्या पहनना चाहिए, क्या खाना चाहिए, कैसा व्यवहार करना चाहिए, खुद को कैसे फिट रखना चाहिए और मातृत्व के बारे में पढ़ाया जाएगा। लखनऊ विवि के अलावा डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विवि अयोध्या में भी गर्भ संस्कार में सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया गया है।


मंगलवार, 3 नवंबर 2020

Nautanki : खत्म होता यूपी का लोकनृत्य, नगाड़े का नाद और तबले की ताल अब नहीं सुनाई देती

 


- पहले वीसीआर-टीवी ने और फिर मोबाइल ने खत्म किया Nautanki का क्रेज

- प्रेरणादायक कहानियों की बजाय बढ़ती फूहड़ता और अश्लीलता ने कम की नौटंकी की लोकप्रियता

- राजा हरिश्चंद्र, श्रवण कुमार, आल्हा-ऊदल, सुल्ताना डाकू और फूलन देवी जैसे पात्रों की कहानियां दिखाई जाती थीं

- नौटंकी में कविता और साधारण बोलचाल की भाषा इस्तेमाल की जाती थी, संवाद में तुकबंदी भी

- नौटंकी में सारंगी, तबले, हारमोनियम और नगाड़े जैसे वाद्य यंत्र इस्तेमाल होते हैं।

- अब नौटंकी न तो नौटंकी के कलाकार बचे हैं और न ही कद्रदान


Nautanki. नौटंकी उत्तर प्रदेश का लोकनृत्य (Uttar Pradesh Folk dance Nautanki) है जो अब विलुप्त सा होता जा रहा है। आज से दो दशक पहले नौटंकी ही लोगों के मनोरंजन का महत्वपूर्ण साधन हुआ करती थी। शादी-बारात हो या फिर कोई अन्य मांगलिक कार्यक्रम लोग अपनी खुशियां सेलिब्रेट करने के लिए नौटंकी का आयोजन करवाते थे। सहालग पर ग्रामीण इलाकों में कोई ऐसा दिन नहीं होता था, जब दो-चार कोस पर हर दिन नौटंकी के नगाड़े नहीं गूंजते हों। इसके अलावा भी लोग चंदा जमाकर हफ्ते भर के लिए नौटंकी का आयोजन करवाते थे। राजा हरिश्चंद्र, श्रवण कुमार, आल्हा-ऊदल के अलावा सुलताना डाकू और फूलन देवी जैसे कई पात्रों की कहानियां विशेष शैली में गा-गाकर दिखाई जाती थीं। लोग मजे-मजे लेकर नौटंकी देखा करते थे। हरदोई जिले के कोथावां ब्लॉक निवासी राम खेलावन बताते (55) हैं कि बचपन में अक्सर नौटंकी देखने जाते थे। पुराने दिनों को याद करते हुए वह कहते हैं कि शाम होते ही जैसे नगाड़े की आवाज कानों में गूंजती, उनसे रहा नहीं जाता था। दोस्तों के साथ वह चुपके से निकल जाते थे नौटंकी देखने, फिर चाहे वह कितनी ही दूर क्यों न हो। सुबह खत्म होते ही वह घर लौट आते थे।

वैसे तो पूरे उत्तर प्रदेश में नौटंकी खूब देखी जाती, लेकिन कानपुर, इलाहाबाद और लखनऊ इसके प्रमुख केंद्र थे। धीरे-धीरे नौटंकी में फूहड़ता ने जगह बना ली। अब यहां प्रेरणादायक कहानियों की बजाय अश्लीलता परोसी जाने लगी। समाज के उच्च-दर्जे के लोग इसे 'सस्ता' और 'अश्लील' समझने लगे। वीसीआर (वीडियो कैसेट रिकॉर्डर) और टीवी (टेलिविजन) के अधिक चलन ने नौटंकी को हाशिये पर पहुंचा दिया। दूर संचार क्रांति और हर हाथ में मोबाइल के चलन की वजह लोग नौटंकी ही भूल गये। नौटंकी के सामानों के बड़े विक्रेताओं ने भी दुकानें बंद कर दीं। ऐसा ही एक नाम था लखनऊ के कुक्कू जी का, जिनके जिक्र के बिना अवध में नौटंकी के विकास या इतिहास की बात करना बेमानी था। स्व.कक्कू जी ने केवल भारत के विभिन्न स्थानों पर ही नहीं बल्कि विदेशों (लाहौर, करांची, नेपाल) में भी नौटंकी की है। नौटंकी विधा को लोकप्रिय बनाने व विकास करने के लिए भारत सरकार द्वारा कई पुरस्कार दिए गए। 

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एक-एक शो के लिए आते थे 20 हजार तक दर्शक

वर्ष 1920 में कक्कू जी ने लखनऊ के यहियागंज में नौटंकी के सामान की एक दुकान खोली। उनकी दुकान लगभग पिछले 100 वर्षों से भी अधिक समय से चल रही है। गांव हो या शहर नौटंकी का हर कलाकार या उससे जुड़ा व्यक्ति कक्कू जी और उनकी दुकान को जानता व पहचानता था। हालांकि, अब कोई नियमित तो वहां नहीं बैठता, लेकिन कस्टमर पहुंचने पर उनके बेटे सामान देने आ जाते हैं। 90 के दशक में कक्कू जी के स्वर्गवास के बाद उनके पुत्र बालकिशन जी दुकान चलाते हैं। बालकिशन जी बताते हैं कि पिताजी के समय पर ग्राहकों की लाइन लगी रहती थी अब तो कभी-कभी ही कोई ग्राहक आ जाता है। दुकान लगभग बंद कर दी है। अब उन्होंने बर्तन दुकान खोल ली है और नौटंकी के सामान को उठाकर घर में रख दिया है। जब कभी कोई ग्राहक आता है तो उसे घर ले जाकर सामान दे देते हैं। वह बताते हैं कि पिता जी के समय में लोगों के मनोरंजन का एकमात्र साधन नौटंकी ही था। दर्शक टिकट के लिए मारपीट तक कर देते थे। टिकटों की पहले ही बुकिंग हो जाती थी। एक शो के लिए 20,000 तक दर्शक आ जाते थे।

अब न कलाकर बचे और न ही कद्रदान

अब नौटंकी क्रेज खत्म हो गया है, जिसके चलते न तो कलाकार बचे हैं और न ही कद्रदान। कलाकारों ने नौटंकी की बजाय अब दूसरा पेशा चुन लिया। आखिर उन्हें भी तो अपनी रोजी-रोटी चलानी है। नौटंकी में कविता और साधारण बोलचाल की भाषा इस्तेमाल की जाती थी। तुकबंदी के जरिए संवाद किया जाता। नौटंकी में सारंगी, तबले, हारमोनियम और नगाड़े जैसे वाद्य इस्तेमाल होते हैं। तुकबंदी को उदाहरण से समझिए- सुल्ताना डाकू है बड़ा होशियार, पुलिस भी जाती है उससे हार..


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सोमवार, 2 नवंबर 2020

IPL 2020 : चेन्नई ने पंजाब को किया बाहर, KKR की उम्मीदें बरकरार, प्लेऑफ की रेस में 5 टीमें



- Chennai Super Kings ने Kings XI Punjab को प्लेऑफ की रेस से किया बाहर

- Rajastha Royals को हराकर Kolkata Knight Riders ने प्लेऑफ की उम्मीदें रखीं कायम

- Indian Premier League-13 के लीग राउंड में बचे हैं सिर्फ दो मैच

- Delhi Capitals और Royal Challengers Bangalore में नंबर दो टक्कर आज

- IPL 2020 में Mumbai Indians और Sunrisers Hyderabad के बीच मुकाबला 03 नवम्बर को

- राजस्थान रॉयल्स, चेन्नई सुपरकिंग्स और किंग्स इलेवन पंजाब की टीमें Playoff की रेस से हो चुकी हैं बाहर

Indian Premier League. इंडियन प्रीमियर लीग के 13वें सीजन (IPL-13) के लीग राउंड में सिर्फ दो मैच बचे हैं, लेकिन भी तक अंतिम चार टीमों के नाम तय नहीं हो सके हैं। मुम्बई इंडियन्स (Mumbai Indians) प्लेऑफ (Playoff) में अपनी जगह पक्की कर चुकी है, लेकिन शेष तीन टीमें कौन होंगी मंगलवार को पता चल पाएगा। तब तक अगर-मगर की कयासबाजी चलती रहेगी। हालांकि, रविवार को खेले गये दो मैचों से उन टीमों का नाम साफ हो गया जो प्लेऑफ (IPL 2020) में नहीं पहुंच पाएंगी।

रविवार को कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने राजस्थान रॉयल्स (RR) को 60 रनों से हरा उसके प्लेऑफ में पहुंचने की उम्मीदों को खत्म कर दिया, लेकिन कोलकाता अंतिम चार पहुंचेगी या नहीं, यह सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) और मुम्बई इंडियंस (MI) के बीच मुकाबले से तय होगा। अगर हैदराबाद हारती है तो केकेआर के लिए प्लेऑफ की साफ हो सकती है। रविवार को खेले गये दूसरे मुकाबले में चेन्नई सुपरकिंग्स (CSK) ने किंग्स इलेवन पंजाब (Kings XI Punjab) 9 विकेट से हराकर प्लेऑफ में पहुंचने की पंजाब की उम्मीदों को खत्म कर दिया।

दिल्ली-बैंगलुरू में नंबर दो की लड़ाई

चेन्नई सुपरकिंग्स, किंग्स इलेवन पंजाब, राजस्थान रॉयल्स प्लेऑफ की रेस से बाहर हो चुकी हैं। अंकतालिका में सबसे निचले पायदान पर राजस्थान रॉयल्स है। मुंबई नंबर एक पर है। अब तक मुंबई इंडियंस ही अकेली ऐसी टीम है जिसने 16 प्वाइंट्स के साथ प्लेऑफ में जगह बनाई है। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलुरू (RCB) और दिल्ली कैपिटल्स के बीच आज होने वाले मुकाबले से तय हो जाएगा कि नंबर दो पर कौन रहेगा। जो टीम जीतेगी वह सीधे प्लेऑफ में पहुंच जाएगी। हैदराबाद और कोलकाता में कोई टीम नंबर चार पर रहेगी। मुंबई इंडियन्स को हराकर ही कप्तान डेविड वार्नर की टीम अंतिम चार में बेहतर रनरेट की वजह से जगह बना पाएगी।

अंकतालिका में कौन कहां

मुंबई- 13 मैच, 09 जीत, प्वांइट्स- 16

बैंगलुरू- 13 मैच, 07 जीत, प्वांइट्स- 14

दिल्ली- 13 मैच, 07 जीत, प्वांइट्स- 14

कोलकाता- 14 मैच, 07 जीत, प्वांइट्स- 14

हैदराबाद- 13 मैच, 06 जीत, प्वांइट्स- 12

पंजाब- 14 मैच, 06 जीत, प्वांइट्स- 12

चेन्नई- 14 मैच, 06 जीत, प्वांइट्स- 12

राजस्थान- 14 मैच, 06 जीत, प्वांइट्स- 12


रविवार, 1 नवंबर 2020

Covid-19 की दूसरी लहर ने बढ़ाई टेंशन, यहां फिर से एक महीने का Lockdown




 - जर्मनी, फ्रांस और बेल्जियम में भी नये सिरे से लग सकता है Lockdown

- नवम्बर के आखिर तक भारत में आ सकती है Covid-19 की दूसरी लहर

- Coronavirus की दूसरी लहर है बेहद खतरनाक, संक्रमण फैला तो जा सकती हैं ज्यादा जान

- Slogan 'दो गज दूरी, मास्क है जरूरी', 'हाथ धोना-रोके कोरोना' और 'जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं' का करें पालन


लंदन. कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण की दूसरी लहर (Coronavirus Second Wave) ने भारत सहित कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। समूचे यूरोप में कोरोना वायरस संक्रमण (Covid-19) तेजी से बढ़ रहा है। जर्मनी, फ्रांस और बेल्जियम में नये सिरे से लॉकडाउन की तैयारी है। संक्रमण को देखते हुए ब्रिटेन (Britain) एक बार फिर से लॉकडाउन हो गया है। लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान गैर-जरूरी दुकानें, रेस्तरां, बार और पब आदि बंद रहेंगे। लोगों को केवल एक व्यक्ति से, वो भी घर के बाहर मिलने की अनुमति होगी। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने बढ़ते कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए चार हफ्ते यानी एक महीने तक लॉकडाउन लगाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के अलावा अब कोई विकल्प नहीं है। समय रहते अगर सख्ती नहीं की गई तो कोरोना की दूसरी लहर में पहली लहर से ज्यादा लोगों की मौत (Death) हो सकती है।

कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की सूची में शामिल भारत के लिए कोरोना की दूसरी लहर चिंता का सबब बन सकती है। नीति आयोग के सदस्य व महामारी से निपटने के प्रयासों में समन्वयन के लिए गठित विशेषज्ञ पैनल के प्रमुख वी के पॉल ने कहा है कि सर्दियों (Cold Season) के मौसम में कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। बीते दिनों में जिस तरीके से यूरोप भर के देशों में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। सर्दियों में कोरोना की दूसरी लहर की संभावना से इनकार नहीं कर सकते हैं। बहुत सी चीजें हो सकती हैं और हम अभी भी वायरस के बारे में सीख रहे हैं। 

लापरवाही पड़ेगी भारी

सर्दी का मौसम और लोगों की लापरवाही की वजह से कोरोना संक्रमण दूसरी लहर बेहद घातक साबित हो सकती है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) पहले ही इस बार कड़ाके की ठंड का पूर्वानुमान जारी कर चुका है। बीते सालों की अपेक्षा इस बार ज्यादा दिनों तक सर्दी रहेगी। ऐसे में बेहद सतर्क रहना जरूरी है। 'दो गज दूरी, मास्क है जरूरी', 'हाथ धोना-रोके कोरोना' और 'जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं' इस स्लोगन (Slogan) का अक्षरश: पालन करने का वक्त आ गया है, नहीं तो लापरवाही सबको ले डूबेगी। हालत यह है कि सोशल डिस्टेंसिंग तो दूर लोगों ने मास्क लगाने से भी किनारा कर लिया। आजकल बहुत कम लोग मास्क लगाये दिखते हैं। 

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योगी का एसमएस फॉर्मूला

कोरोना की दूसरी लहर रोकने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने लोगों को 'एसएमएस' (SMS) फॉर्मूला अपनाने का निर्देश दिया। 'एस से सोप/सैनिटाइजर, 'एम' से मास्क और 'एस' से सोशल डिस्टेंसिंग। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण को रोकने में यह बेहद उपयोगी है। सभी इसका पालन करें।

'विशेष सावधानी बरतने की जरूरत'

उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव सूचना, नवनीत सहगल (Navneet Sahgal) ने कहा कि प्रदेश में कोविड-19 के संक्रमण दर में लगातार गिरावट आ रही है, लेकिन यह समय और अधिक सावधानी बरतने का है। सभी के लिए आवश्यक है कि कोविड-19 संक्रमण से बचाव के सभी उपायों को अपनाते हुए सावधानी बरतें, जिससे कोरोना संक्रमण की गिरती दर पुनः न बढ़े। उन्होंने कहा कि आस-पास के राज्यों में दोबारा बढ़ रहे कोरोना संक्रमण एवं बदलते मौसम को ध्यान में रखते हुए विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।


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गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020

GBD Global Report : भारत विश्व का सबसे प्रदूषित, 100% लोग प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर

 


- जीबीडी रिपोर्ट का दावा- भारत की 100 प्रतिशत आबादी प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर

- पिछले वर्षों की तुलना में भारत में 2019 में प्रति व्यक्ति प्रदूषण का दबाव 6.5 माइक्रो ग्राम बढ़ा

- रिपोर्ट का दावा, दुनिया भर में वायु प्रदूषण जनित बीमारियों के कारण 2019 में हुईं कूल 67 लाख मौतें

लखनऊ. 21 अक्टूबर को वायु प्रदूषण के आंकड़ों और तथ्यों के साथ ग्लोबल बर्डन ऑफ डीजीस की वैश्विक रिपोर्ट दुनिया भर में एक साथ जारी की गयी। वर्ष 2019 के अध्ययन के आधार पर जारी की गयी इस रिपोर्ट में दुनिया भर के 116 देशों में लगे 10 हज़ार 4 सौ 8 वायु प्रदूषण मापन इकाईयों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर इस रिपोर्ट का संकलन और प्रकाशन किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर भारत विश्व में प्रदूषित देशों के पायदान में पहले नंबर पर पाया गया, जहां देश की सम्पूर्ण आबादी वायु प्रदूषण के चपेट में जीवन जीने को बाध्य है।

जीबीडी की यह वार्षिक वैश्विक रिपोर्ट हेल्थ इफेक्ट इंस्टिट्यूट और इंस्टिट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवलुएशन द्वारा हर वर्ष साझे रूप से जारी की जाती है। सौ से अधिक देशों में वर्ष भर मिले वायु गुणवत्ता के आंकड़ों के आधार पर जारी होने वाली यह रिपोर्ट तथ्यात्मक और भरोसेमंद मानी जाती है।

इस रिपोर्ट में दिए गए तथ्यों के बारे में विस्तार से बताते हुए क्लाइमेट एजेंडा की निदेशक एकता शेखर ने बताया 'भारत में पिछले एक दशक में वायु प्रदूषण का स्तर निरंतर बढ़ता जा रहा है, जीबीडी की यह ताजा तरीन रिपोर्ट भी बताती है कि देश में वायु प्रदूषण का प्रति व्यक्ति औसत 6.5 माइक्रोग्राम बढ़ा है। और विश्व के 116 देशों की तुलना में सबसे ज्यादा बढ़कर 83 माइक्रोग्राम प्रति व्यक्ति तक पहुंच चुका है, जिसे भारत सरकार के मानकों के अनुसार अधिकतम 60 माइक्रोग्राम तक होना चाहिये था। यह आंकड़े बताते हैं कि भारत की सौ प्रतिशत आबादी भारत सरकार के मानकों के आधार पर भी और विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के आधार पर भी प्रदूषित हवा में सांस लेने के मजबूर हो चुकी है।'

दुनिया के यह 6 देश हैं सबसे प्रदूषित

क्लाइमेट एजेंडा की निदेशक एकता शेखर ने कहा कि रिपोर्ट में यह बताया गया है कि अफ्रीका और एशिया महादेश के राष्ट्रों में वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा संकट है। इसमें भारत, नेपाल, नाइजर, क़तर, नाइजीरिया, इजिप्ट शीर्ष 6 प्रदूषित देश हैं, जबकि बांग्लादेश और पाकिस्तान को क्रमशः नौवां और दसवां स्थान मिला है।

भारत में एक लाख बच्चों की मौत

वायु प्रदूषण जनित बीमारियों और उनसे होने वाली मौतों के आंकड़ों के बारे में रिपोर्ट के हवाले से एकता शेखर ने बताया 'अफ्रीका और एशिया के देशों में खराब हवा के कारण वर्ष 2019 में 5 लाख से अधिक नवजात बच्चों की मौत अपने जन्म से एक माह के भीतर हो गयी। एक माह की उम्र पूरा करने से पहले ही वायु प्रदूषण जनित बीमारियों से वर्ष 2019 में अकेले भारत में ही एक लाख से अधिक बच्चों की मौत हुई। पूरी दुनिया में इन बीमारियों से कूल 67 लाख मौते हुईं, जिन्हें वायु प्रदूषण का स्तर कम कर के बचाया जा सकता था। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में असमय/अकाल मौतों का सबसे बड़ा कारण अब वायु प्रदूषण जनित बीमारियां ही हैं।'

फेफड़ों पर कोविड-19 का गहरा असर

क्लाइमेट एजेंडा की निदेशक एकता शेखर ने बताया कि जीबीडी रिपोर्ट यह भी बताती है कि वायु प्रदूषण से पहले से ही कमजोर हो चुके भारतीय जनता के फेफड़ों पर कोविड 19 का गहरा असर पड़ने की आशंका है।

Note : जीबीडी द्वारा जारी रिपोर्ट को विस्तार से https://www.stateofglobalair.org/  वेबसाइट पर पढ़ा जा सकता है।

रविवार, 6 सितंबर 2020

Black Spots : यूपी में ये हैं जानलेवा मार्ग, यहां होते हैं सबसे ज्यादा हादसे

 


- उत्तर प्रदेश की सड़कों पर 495 Black Spots चिन्हित

- संभल कर करें ड्राइविंग, जरा सी असावधानी दुर्घटना का सबब बन सकती है

- सभी ब्लैक स्पॉट को सुधारने के लिए कार्ययोजना तैयार कर रहा है पीडब्ल्यूडी

लखनऊ. ड्राइविंग करते वक्त बेहद शानदार रहें। आपकी जरा सी असावधानी दुर्घटना का सबब बन सकती है। उत्तर प्रदेश की सड़कों पर करीब 500 डेथ प्वाइंट हैं, जहां आये दिन होने वाले हादसों में लोग जान गंवाते रहते हैं। यूपी की विभिन्न सड़कों पर 495 'ब्लैक स्पॉट' (Black Spots)चिन्हित किये हैं, जहां अब तक 10 या उससे ज्यादा लोग हताहत हो चुके हैं। पीडब्ल्यूडी के मार्गों पर पर चिन्हित ब्लैक स्पॉट में अधिकांश वो जंक्शन प्वाइंट हैं, जहां कोई ग्रामीण मार्ग (एमडीआर) किसी स्टेट हाईवे या प्रमुख जिला मार्ग से आकर मिलता है। कुछ हादसे संकरी पुलिया के कारण भी होते हैं। पीडब्ल्यूडी ने प्रदेश के सभी ब्लैक स्पॉट को सुधारने के लिए कार्ययोजना तैयार कर रहा है।

ब्लैक स्पॉट उन स्थानों को चिन्हित किया जाता है, जहां एक ही दुर्घटना में 10 या उससे अधिक लोगों की मौत हुई है या फिर इतने ही ही लोग गंभीर रूप से घायल हुए हों। इसके अलावा उन स्पॉट्स को भी ब्लैक स्पॉट कहा जाता है, जहां बीते तीन वर्षों में अलग-अलग समय पर हुए हादसों में 10 या उससे अधिक लोग हताहत हुए हों।

इन स्थानों पर होने वाले हादसों को रोका जा सके इसके लिए पीडब्ल्यूडी दीर्घकालीन कार्ययोजना तैयार कर रहा है। पीडब्ल्यूडी अफसरों का कहना है कि अल्पकालीन उपाय के तौर पर रंबल स्ट्रिप (स्पीड ब्रेकर) और साइनबोर्ड की व्यवस्था की गई है। वहीं, स्थायी हल के लिए ब्लैक स्पॉट वाली मोड़ों को सीधा करना और संकरी पुलिया को चौड़ी करने की योजना पर काम किया जा रहा है।

इन मार्गों पर सबसे ज्यादा ब्लैक स्पॉट

लोक निर्माण विभाग में उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के इटावा-मैनपुरी मार्ग, अलीगंज-सोरो मार्ग, इलाहाबाद-गोरखपुर मार्ग, उन्नाव-कानपुर मार्ग, कासगंज-अतरौली मार्ग, गोरखपुर-देवरिया-बलिया मार्ग, जीटी रोड, तम्बौर-महमूदाबाद मार्ग, दातागंज-समरेर-बल्लिया मार्ग, दिल्ली-बरेली-लखनऊ मार्ग, दिल्ली-मेरठ पुराना राष्ट्रीय मार्ग-58, पलिया-लखनऊ मार्ग, पीलीभीत-बरेली-मथुरा-भरतपुर मार्ग, पीलीभीत-बरेली शहरी भाग, बहराइच-फैजाबाद-आजमगढ़ मार्ग, बहराइच-सीतापुर मार्ग, बिलराया-पनबाड़ी मार्ग, बुलंदशहर-सियाना-गढ़ मार्ग, मुरादाबाद-फर्रुखाबाद मार्ग, रिंग मार्ग कानपुर मार्ग से रायबरेली मार्ग, लखनऊ-बलिया मार्ग, लखनऊ-बांगरमऊ-बिल्हौर मार्ग, लिपुलेख-भिंड मार्ग, शिकोहाबाद-भोगांव मार्ग, हमीरपुर-राठ-मझगवां आदि मार्गों पर सबसे ज्यादा ब्लैक स्पॉट हैं।

शुक्रवार, 21 अगस्त 2020

Sonu Sood : दि रियल हीरो...

 


- Corona Epidemic के दौरान लोगों के लिए मसीहा बनकर उभरे हैं Sonu Sood

- एक दिन में 41,000 से ज्यादा लोगों ने मांगी सोनू सूद से मदद

- बिना जाति-धर्म देखे सबकी कर रहे बेझिझक मदद, विदेशों से भी आ रहे हेल्प मैसेज


'खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बन्दे से खुद पूछे कि बता तेरी रज़ा क्या है'... उर्दू शायर अल्लामा इकबाल की पंक्तियां Sonu Sood पर बिल्कुल फिट बैठती हैं। Corona Epidemic के दौरान सोनू सूद लोगों के लिए मसीहा बनकर उभरे हैं। इस दौरान जिस किसी ने उनसे मदद मांगी, जाति-धर्म देखे बिना सोनू ने बेझिझक सबकी मदद की। बहन के ऑपरेशन के लिए पैसे नहीं हैं? बाढ़ सब बहा ले गई है? कहीं फंसे हैं? या कोई और दिक्कत है? बिना किसी स्वार्थ के वह सबकी मदद कर रहे हैं। लॉकडाउन में फंसे लोगों को जब कोई उम्मीद नहीं दिखी तो सोनू सूद ने उनकी मदद की। जररूत के मुताबिक, उन्हें बसों-गाड़ियों और हवाई जहाज से भेजा। भूखों को खाना खिलाया। बीमारों के इलाज में मदद की। और वह सबकी मदद कर रहे हैं। लोगों को भरोसा है सरकार और रिश्तेदार भले न सुनें, लेकिन सोनू सूद मदद जरूर करेंगे।

हाल ही में सोनू सूद ने एक आदिवासी बच्ची की मदद करने का एलान किया है। एक आदिवासी लड़की का वीडियो शेयर करते हुए दरअसल, ट्विटर पर यूजर ने लिखा था कि बाढ़ में अंजली का घर लगभग जमींदोज हो गया। नेस्तानाबूद हुए घर को देखकर तो नहीं मगर बांस की बनी टोकरी में रखी हुईं अपनी भीगी हुई पुस्तकों को देख इस बच्ची के आंखों में आंसू आ गए। किसी आदिवासी बच्ची में ऐसा पुस्तक प्रेम मैंने पहली बार देखा। सोनू सूद से मासूम की आखों में आंसू नहीं देखे गये। उन्होंने रिप्लाई करते हुए लिखा- 'आंसू पोंछ ले बहन, किताबें भी नई होंगी, घर भी नया होगा।' सिर्फ यह बच्ची ही नहीं सोनू सूद अब तक लाखों की मदद कर चुके हैं।

ट्विटर, फेसबुक, हेल्पलाइन, ई-मेल, इंस्टाग्राम पर तमाम लोग सोनू सूद मदद मांग रहे हैं। वह हर किसी की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मदद मांगने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है। आलम यह है कि एक दिन में 41 हजार से ज्यादा लोगों ने उनसे मदद मांगी। मदद मांगने वालों में विदेशों से भी हैं। लोगों को अपने करीबियों से ज्यादा सोनू से उम्मीदें हैं। वह भी दिल खोलकर मदद कर रहे हैं। सोचिए, इतने लोगों की मदद कर पाना अकेले सोनू के बस की बात नहीं, लेकिन वह मुस्कराकर सभी की मदद कर रहे हैं। इतना ही नहीं वह माफी भी मांगते हैं कि अगर किसी वजह से मैसेज न पढ़ पाये हों। 

फिल्मों धाकड़ विलेन का धाकड़ रोल निभाने वाले सोनू सूद रियल लाइफ में असली हीरो हैं। ऐसे समय में जब कोई किसी को बिना स्वार्थ के 'भूनी भांग' तक नहीं देता, जिंदगी की गाढ़ी कमाई वह दोनों हाथों से लुटा रहे हैं। एक ट्विटर यूजर ने कहा कि 'बस इतना क़ामयाब होना है कि सोनू सूद सर जैसे सबकी मदद कर सकूं। इस ट्वीट पर सोनू ने रिप्लाई करते हुए लिखा- 'कामयाब होकर मदद नहीं की जाती भाई.. मदद करने से कामयाब होते हैं।' 

कहते हैं कि 'परसत मन मैला करे सो मैदा जलि जाय..' सच में कामयाबी और मदद का कोई लेना देना नहीं हैं। किसी की मदद करना बड़े दिल की बात होती है। घर भरा होने पर भी लोग भिखारियों को भगा दिया करते हैं। आज अगर देश के कामयाब लोगों में से 10 फीसदी भी सोनू सूद की तरह दूसरों की मदद करें तो तस्वीर बदलते देर नहीं लगेगी। लेकिन इसके लिए जरूरी है सच्चा सेवा भाव। वरना आप सबको युधिष्ठिर की राजसूय यज्ञ और सुनहले नेवले वाली कहानी तो याद ही होगी...


मंगलवार, 18 अगस्त 2020

Corona Virus : सामने है कोरोना की असाधारण चुनौती

28 coronavirus myths busted


 - सावधानी और धैर्य ही महामारी से बचाव का एकमात्र तरीका

- देश में 26 लाख पार कोरोना संक्रमित, 50 हजार से अधिक की मौत

- होम आइसोलेशन में लापरवाही भी बढ़ा रही मुश्किल


देश में कोरोना महामारी असाधारण चुनौतियां लेकर आई है। नए-नए तरीकों से लोगों पर अटैक कर रहा है। आम क्या खास सभी संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। किसी में लक्षण दिखते हैं तो किसी में नहीं। अभी तक कोरोना से पूरी तरह सुरक्षित बताये जा रहे नवजात भी अब इसकी चपेट में आ रहे हैं। लखनऊ में तीन नवजातों में कोरोना की पुष्टि हुई है, जबकि मां निगेटिव थी। देश में अब संक्रमित लोगों की संख्या 26 लाख के पार हो चुकी है जबकि संक्रमण से मरने वाले 50 हजार का आंकड़ा पार कर चुके हैं। हर दिन सैकड़ों की संख्या में लोग दम तोड़ रहे हैं। हालांकि, इस बीच देश सरकार ने जहां कोविड जांच में तेजी बढ़ाई है वहीं, अस्पतालों में भी लगातार बेड बढ़ाए जा रहे हैं। बावजूद अभी और तेजी दिखाने की जरूरत है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया कहते हैं कि अपने देश में अभी कोरोना चरम पर नहीं आया है। ऐसे में सावधानी और धैर्य ही महामारी से बचाव का एकमात्र तरीका है।

संक्रमण की रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है देश में कोविड-19 से संक्रमित लोगों की संख्या 26 लाख के पार हो चुकी है और मरने वालों का आंकड़ा 50 हजार के पार जा चुका है। भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 15 दिनों के भीतर उत्तर प्रदेश के दो कैबिनेट मंत्रियों की मौत हो गई। बेस्ट ट्रीटमेंट होने के बावजूद मंत्री चेतन चौहान और कमला रानी वरुण कोरोना से जंग नहीं जीत सके। कोरोना के चलते ही पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के दो विधायक दम तोड़ चुके हैं। यूपी के कुल नौ मंत्री कोरोना की चपेट में आ चुके हैं, जिनमें से दो की मौत हो चुकी है। इसके अलावा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बीजेपी यूपी अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल सहित कई बड़े नाम कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। 

होम आइसोलेशन में लापरवाही बढ़ा रही मुश्किल

22 जुलाई से होम आइसोलेशन लागू है। इसके बाद अफसरों के लिए मरीजों को अस्पताल शिफ्ट करने का झंझट खत्म हुआ। बिना लक्षण वाले मरीजों को भी घर उपचार का लाभ मिला, लेकिन इस बीच मानकों को नजरअंदाज कर मरीज को होम आइसोलेशन की अनुमति दी जाने लगी। रोगी के लिए घर में अलग कमरा-बाथरूम न होने पर भी उसे होम आइसोलेट कर दिया गया। साथ ही काफी दिनों तक होम आइसोलेशन के मरीजों की मॉनिटरिंग भी ठप रही है। मरीजों को दवा खुद खरीदने बाहर जाना पड़ा। लापरवाही उजागर होने पर अब हेलो डॉक्टर हेल्पलाइन नंबर व क्षेत्रीय अर्बन पीएचसी-सीएचसी के डॉक्टरों के नंबर जारी कर दिए गये हैं।

सोमवार, 17 अगस्त 2020

National Digital Health Mission : हेल्थ आईडी में होगी आपके स्वास्थ्य की हर जानकारी

PM Launches National Digital Health Mission - The Indian Practitioner


- नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत हर नागरिक को एक छतरी के नीचे लाने की तैयारी

- हर एक देशवासी की होगी हेल्थ आईडी, एक क्लिक पर हर नागरिक के स्वास्थ्य का होगा लेखा-जोखा

- देश के किसी भी हिस्से में बैठा डॉक्टर आपकी अनुमति के बाद आपकी पूरी ट्रीटमेंट हिस्ट्री देख सकेगा


केंद्र सरकार सबके लिए नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन लेकर आ रही है। इसके तहत हर देशवासी की हेल्थ आईडी होगी, जिसमें हर नागरिक के स्वास्थ्य का पूरा लेखा-जोखा होगा। आपके हर टेस्ट, हर बीमारी, आपको किस डॉक्टर ने कौन सी दवा दी, कब दी, आपकी रिपोर्ट्स क्या थीं, ये सारी जानकारी इसी एक हेल्थ आईडी में समाहित होगी। संबंधित व्यक्ति की अनुमति के बाद ही इसे कहीं भी देखा जा सकेगा। मतलब देश के किसी भी हिस्से में बैठा डॉक्टर भी अनुमति के बाद मरीज की पूरी हिस्ट्री देख सकेगा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने एलान किया कि केंद्र सरकार पूरे देश में नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन लेकर आएगी। योजना को लॉन्च करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन, भारत के हेल्थ सेक्टर में नई क्रांति लेकर आएगा।

नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत आपका एक यूनिक कार्ड जारी किया जाएगा, जो आधार कार्ड की तरह होगा। इसके जरिए मरीज के निजी मेडिकल रिकॉर्ड का पता लगाया जा सकेगा। फिलहाल, यह अनिवार्य नहीं होगा। मतलब कि यह आप पर निर्भर है कि इससे जुड़ रहे हैं या नहीं। मरीज का डेटा रखने के लिए अस्पताल, क्लिनिक, डॉक्टर एक सेंट्रल सर्वर से लिंक रहेंगे। इसमें डॉक्टर, अस्पताल या जांच क्लिनिक भी रजिस्टर्ड होंगे। हालांकि, इनके लिए भी ये व्यवस्था अभी अनिवार्य नहीं है। इस योजना में ई-फार्मेसी और टेलीमेडिसिन सेवा को भी शामिल किया जाएगा।


खास बातें

- हर नागरिक को यूनिक हेल्थ आईडी दी जाएगी

- यूनिक आईडी को आधार से लिंक करवाने का विकल्प आपके पास होगा

- यूनिक आईडी पूरी तरह से स्वैच्छित तरीके से काम करेगी

- आईडी में नागरिकों का लेखा-जोखा खुद से सरकारी कम्यूनिटी क्लाउड में स्टोर हो जाएगा

- यह एक तरह से डिजिलॉकर की तरह काम करेगा

- कैश ट्रांसफर स्कीम का लाभ लेने के लिए अपनी हेल्थ आईडी को आधार कार्ड से लिंक करना होगा

- इस प्लेटफॉर्म के जरिए देश के हर डॉक्टर को यूनिक पहचानकर्ता दिया जाएगा

- डॉक्टर्स को डिजिटल हस्ताक्षर दिया जाएगा, जिसकी मदद से वो मरीजों को प्रिसक्रिप्शन लिख सकेंगे

- नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत हर नागरिक को एक छतरी के नीचे लाने की तैयारी है

- यह एक निजी हेल्थ रिकॉर्ड होगा, क्योंकि इसमें अपने डाटा का स्वामित्व खुद के पास ही होगा

- मरीज की सहमति के बिना कोई भी उसका हेल्थ डाटा नहीं देख सकेगा

Chetan Chauhan : क्रिकेट से लंबी रही चेतन चौहान की सियासी पारी

 चेतन चौहान


- कोरोना संक्रमण की वजह से यूपी के कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान का निधन

- चेतन से पहले 2 अगस्त को एक और कैबिनेट मंत्री कमला रानी वरुण का निधन हो चुका है

- 12 वर्ष तक देश के लिए क्रिकेट खेलने वाले चेतन चौहान 29 साल तक राजनीति में सक्रिय रहे


उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या डेढ़ लाख पार कर चुकी है। अब तक 2500 के करीब मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें आम आदमी से लेकर मंत्री-संतरी तक शामिल हैं। रविवार को योगी आदित्यनाथ कैबिनेट के दूसरे मंत्री चेतन चौहान का निधन हो गया। 73 वर्षीय चेतन चौहान ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में शाम 4.15 पर अंतिम सांस ली। 11 जुलाई को उनकी कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, जिसके बाद उन्हें लखनऊ के एसपीजीआई में भर्ती कराया गया था। शनिवार शाम को किडनी और ब्लड प्रेशर संबंधित दिक्कत के बाद उन्हें मेदांता ले जा गया था। चेतन चौहान से पहले 2 अगस्त को यूपी की एक और मंत्री कमला रानी वरुण का भी कोरोना के कारण निधन हो चुका है। वह प्राविधिक शिक्षा मंत्री थीं। चेतन चौहान की सियासी पारी क्रिकेट से भी लंबी रही है।

यूपी में कोरोना के संक्रमण में योगी सरकार के नौ मंत्री आ चुके हैं। इनमें से दो का निधन हो गया। कोरोना पॉजिटिव पाये जाने के बाद जल शक्ति मंत्री डॉक्टर महेंद्र सिंह का अभी एसपीजीआई में इलाज चल रहा है। कानून मंत्री बृजेश पाठक की रिपोर्ट अब निगेटिव आई है। अब वे होम आइसोलेशन में हैं। इनके अलावा मंत्री उपेंद्र तिवारी, जेल मंत्री जय प्रताप सिंह, राजेंद्र प्रताप सिंह, धर्म सिंह सैनी, कैबिनेट मंत्री मोती सिंह भी एसजीपीजीआई में भर्ती थे। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद अब यह सभी स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की भी कोविड रिपोर्ट निगेटिव आई है, लेकिन वह अभी होम आइसोलेशन में हैं। जबकि कम से कम छह विधायक भी कोरोना पाजिटिव हैं। जिनका विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

चेतन का राजनीतिक कॅरियर

चेतन चौहान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं। 1991 और 1998 के चुनाव में वह बीजेपी के टिकट पर सांसद बने थे और अब योगी सरकार में सैनिक कल्याण, होमगार्ड, पीआरडी, नागरिक सुरक्षा विभाग के कैबिनेट मंत्री थे। 2017 के विधानसभा चुनाव में वह अमरोहा जिले की नौगांवा विधानसभा से विधायक चुने गये थे। अमरोहा से ही वह दो बार सांसद रहे। तीन बार चुनाव हारने के बावजूद वह राजनीति के मैदान में डटे रहे।

वनडे मैचों में भारतीय टीम के कप्तान भी रहे

भारतीय क्रिकेट टीम में चेतन चौहान एक अहम बल्लेबाज रह चुके हैं। देश के लिए उन्होंने अब तक 40 टेस्ट मैच खेले हैं। टेस्ट मैचों में उनके नाम पर 2084 रन दर्ज हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 97 रन है। टेस्ट मैचं के अलावा चेतन चौहान ने सात वनडे मैचों में टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व भी किया है। महाराष्ट्र और दिल्ली की तरफ से वह रणजी मैच भी खेले हैं। 70 के दशक में वह सुनील गावस्कर के साथ ओपनिंग करते थे।

क्रिकेट से लंबी रही सियासी पारी

क्रिकेटर के तौर पर चेतन चौहान ने दुनिया के विभिन्न क्रिकेट ग्राउंड पर 12 वर्ष तक क्रिकेट खेला। क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद चेतन चौहान ने राजनीतिक पारी शुरू की। बीते 29 साल से वह राजनीति में सक्रिय थे। रविवार को उन्हें दुनिया को अलविदा कह दिया। क्रिकेट की तरह उनका सियासी सफर भी बेदाग रहा।

शनिवार, 15 अगस्त 2020

15 August : झंडा ऊंचा रहे हमारा... याद है न? बचपन में कैसे मनाते थे स्वतंत्रता दिवस

 


- आज 74वां Independence Day मना रहे हैं देशवासी
- बचपन में हफ्तेभर पहले से ही शुरू हो जाती थीं स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां
- खुद ही तैयार करते थे झंडा, देशभक्ति की दर्जनों कविताएं रहती थीं जुबान पर

स्वतंत्रता दिवस का जश्न तो हम बचपन में मनाते थे। अब तो बस खानापूर्ति हो रही है। ऐतिहासिक, सरकारी व निजी दफ्तरों में तिरंगा फहराया। आजादी के महानायकों पर फूलमाला चढ़ाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। आज देशभक्ति सोशल मीडिया तक ही सीमित रह गई, जबकि बचपन में हम ऐसे नहीं थे। आपका तो पता नहीं, लेकिन मुझे याद है कि 15 अगस्त हो या 26 जनवरी तैयारियां एक हफ्ते से ही शुरू हो जाया करती थीं। खूब कविताएं तैयार करते थे। रिहर्सल करते। मां और छोटी बहन को कविताएं सुना-सुनाकर बोर कर दिया करते थे। उन दिनों गांवों में आज के जैसे रेडीमेड तिरंगे नहीं मिलते थे। इसके लिए हम खुद ही आत्मनिर्भर थे। तिरंगा बनाने का हमारा अपना टैलेंट था।

गांवों से आज तालाब गायब हो रहे हैं, उन दिनों तालाब के किनारे से खूब 'सेठा' (नरगद) होता था, जिसे हम काट ले आते। सही से उसको छीलते। सादे कागज पर तिरंगा बनाते जिसेघर में ही बनाई हुई लेई से सेंठा पर लपेटते। ऐसे कम से कम चार-पांच तिरंगे बनाते। एक स्कूल के लिए। दूसरा छत पर लगाने के लिए और बाकी गांव में धमा-चौकड़ी के लिए। एक दिन पहले ही 'झंडा ऊंचा रहे हमारा' गाते हुए बच्चों की टोलियां पूरे गांव में धमा-चौकड़ी करतीं। 15 अगस्त को पापा की साइकिल में, बरामदे में बने छप्पर पर पूरे दिन हमारा तिरंगा लहराया करता था। केवल मैं ही नहीं, बल्कि पूरे गांव में ऐसा ही होता था। हर घर की छत पर कम से कम एक तिरंगा तो दिख ही जाता था और हर घर में 15 अगस्त की तैयारियां।

उन दिनों मैं गांव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ा करता था। अगस्त शुरू होते ही स्कूल में पंडित जी (अध्यापक) स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों में मशगूल हो जाते थे। छात्रों को रोज वंदे मातरम्, देशभक्ति की कविताएं रटाई जाती थीं। भाषण भी तैयार कराए जाते थे। नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद, सरदार भगत सिंह, महात्मा गांधी, रानी लक्ष्मीबाई सभी के चहेते नायक हुआ करते थे। सभी बच्चों को इन महान देशभक्तों के बारे में बहुत कुछ पता रहता था। पता नहीं, अब ऐसा होता है या नहीं।

आखिर वह दिन आ जाता था, जिसके लिए पिछली रात को ठीक से नींद नहीं आई थी। अम्मा भी कहतीं, जाओ स्कूल में कविताएं बढ़िया से सुनाना। संस्कृत में भी देशभक्ति की कविताएं रट लेता था। उन दिनों स्कूल-कॉलेजों में संस्कृत को अंग्रेजी से कमतर तो कतई नहीं आंका जाता था। पर अब सभी अंग्रेजी चाहिए।

खैर छोड़िए, इन बातों में क्या रखा है। हम तो बात कर रहे थे 'तब की आजादी' की। 15 अगस्त को हम सुबह ही स्कूल में पहुंच जाते। पंडित जी सभी को झाड़ू पकड़ा देते। सभी बड़े मन से स्कूल साफ करते। खुशी-खुशी टाट-पट्टियां बिछाते और कुर्सियां लगाते। भूल जाते कि अम्मा ने कितना समझाकर भेजा था कि भइया कविता सुनाने से पहले कपड़े गंदे मत करना। 

सबसे पहले प्राइमरी स्कूल में ही ध्वजारोहण का कार्य संपन्न हो जाया करता था। पास में ही 100 मीटर की दूरी इण्टर कॉलेज था। जहां ऐसे अवसरों पर लाउडस्पीकर लगता था, जिसकी कानफोड़ू आवाज हमें हमारे स्कूल में सुनाई देती थी। 

15 अगस्त के दिन सबसे पहले हमारे नाखून चेक किए जाते। कपड़े साफ पहने हैं या नहीं, यह भी चेक किया जाता। इसके बाद ईश्वर प्रार्थना, ध्वजारोहण, राष्ट्रगान होता फिर कविताओं का दौर चलता। लेकिन इन सबसे पहले स्कूल के पंडित जी या मुंशी जी एक लंबा सा भाषण देने से नहीं चूकते कि कितनी मुश्किल परिस्थितियों में हमें आजादी मिली। राष्ट्रीय पर्वों पर बच्चों में बांटने के लिए हेडमास्टर जी बताशे मंगाते थे, जो हम सबके बीच बांट दिए जाते थे। हर छात्र को एक-एक मुट्ठी बताशा मिलता था। लेकिन हमें तो जलेबी खानी होती थी। वह मिलती थी पड़ोस वाले इंटर कॉलेज में।

कोई चपरासी तो होता नहीं था, इसलिए जल्दी से हम लोग कुर्सी-मेज वगैरह समेटकर रखते और इंटर कॉलेज की तरफ सरपट भाग जाते थे। वहां कोई बाउंड्री वॉल तो थी नहीं, इसिलए मैदान में ही कार्यक्रम का आयोजन होता था। वहीं, सभी छात्र अपनी कविताएं सुनाते थे। प्राइमरी वालों की भीड़ देखते ही तुरंत इंटर कॉलेज के एक मास्टर साहेब डंडी लेकर आ जाते और हम सबको लाइन से बिठाते। हम भी चुपचाप बैठकर कविताएं सुनते, जैसे ही शोरगुल होता मास्टर जी का डंडा सटक जाता था।

कॉलेज में छात्रों के लिए कागज के एक लिफाफे में जलेबियां आती थीं, जिन्हें उनके बीच बांट दिया जाता था। साथ ही प्राइमरी के छात्रों को भी जलेबी के दो-दो छत्ते दिए जाते। जिन्हें लेकर हम तुरंत घर की तरफ भाग जाते। रास्ते में देखते जाते कि किसके पास ज्यादा जलेबी और ज्यादा बताशे हैं।

राष्ट्रीय पर्व के मौके पर एकमात्र गांव में उपलब्ध दूरदर्शन चैनल 2 बजे से किसी देशभक्ति की फिल्म का प्रसारण करता था, जिसे हम देखे बिना हिलते तक नहीं थे। लाइट तो गांव में थी नहीं, इसलिए पहले से ही बैटरी भरवा ली जाती थी। पूरा दिन देशभक्ति के गीत गुनगुनाने में, शहीदों को याद करने में ही निकल जाता था। पर अब ऐसा नहीं होता।

अब तो बस लकीर का फकीर बने हुए हैं। ऐसा लगता है कि अब कोई आजाद नहीं है, न ही किसी प्रकार की आजादी है। हर कोई किसी न किसी तरह की गुलामी में जकड़ा हुआ है। अब तो बस फेसबुक और व्हाट्सएप पर happy Independence day, जय हिंद, जय भारत जैसे स्लोगन लिखकर या तिरंगे की तस्वीर भेज कर इतिश्री कर लेते हैं।

गुरुवार, 13 अगस्त 2020

Ranchod Shri Krishna : रणछोड़ क्यों कहलाए कर्मयोगी श्रीकृष्ण?

 माखन चोर श्रीकृष्ण एक समुद्री ...

- ललितपुर के जाखलान थाना क्षेत्र में है 5 हजार वर्ष पुराना रणछोड़ धाम मंदिर

- राक्षस कालयवन के वध से जुड़ा है यह स्थान, मुचकुंद की गुफाओं में निवास करते थे देवता

- बेतवा नदी (वेत्रवती नदी) किनारे हर बरस लगता है मेला, दूर-दूर से लीलाधर श्रीकृष्ण के दर्शन करने आते हैं श्रद्धालु

ललितपुर. कर्मयोगी भगवान श्री कृष्ण रणछोड़ क्यों कहलाए? ललितपुर जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश की सीमा का अहसास कराने वाली बेतवा नदी के किनारे स्थित जंगलों में इसका रहस्य छुपा है। थाना जाखलौन के धोर्रा क्षेत्र के जंगलों के बीचो-बीच रणछोड़ धाम मंदिर और मुचकुंद गुफाएं हैं। देवराज इन्द्र और देवता कभी-कभी यहां निवास किया करते थे। श्रीमदभागवत महापुराण के दशम स्कन्द के 50, 51, 52 अध्याय में इनका उल्लेख है। बेतवा नदी (वेत्रवती नदी) के तट पर लगभग 5 हजार वर्ष पुराना भगवान रणछोड़ का मंदिर है। इसे राजा मुचकुंद बनवाया था। इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य मूर्ति है। भगवान रणछोड़ के दर्शन के लिए बेतवा नदी के तट पर प्रतिवर्ष मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर यहां भगवान के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है। तो चलिए जानते हैं विंध्य की पहाड़ियों में ऐसा क्या हुआ कि कर्मयोगी कृष्ण रणछोड़ बन गए।


श्रीमदभागवत महापुराण में उल्लेख है कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन में एक समय ऐसा भी आया था जब उन्होंने अपने शत्रु से मुकाबला न करके मैदान छोड़ना ही उचित समझा। ये प्रसंग तब का है, जब महाबली मगधराज जरासंध ने कृष्ण को युद्ध के लिए ललकारा था। जरासंध ने कृष्ण के साथ युद्ध करने के लिए अपने साथ कालयवन नाम के राजा को भी मना लिया था। कालयवन को भगवान शंकर से वरदान मिला था कि न तो चंद्रवंशी और न ही सूर्यवंशी उसका कभी कुछ बिगाड़ पाएंगे। उसे न तो कोई हथियार खरोंच सकता है और न ही कोई उसे अपने बल से हरा सकता है। ऐसे में उसे मारना बेहद मुश्किल था। जरासंध के कहने पर कालयवन ने बिना किसी शत्रुता के मथुरा पर आक्रमण कर दिया। लीलाधर श्री कृष्ण को उसके वरदान के बारे में पता था। उन्हें पता था कि कालयवन को युद्ध में नहीं हराया जा सकता। इसलिए वह उस राक्षस की ललकार सुनकर रणभूमि छोड़कर भाग निकले। कालयवन भी पीछे-पीछे दौड़ा। भागते भागते वह जनपद ललितपुर क्षेत्र में स्थित बेतवा नदी के किनारे आ गए थे। यहां वह एक गुफा में छिप गये, जहां राक्षसों से युद्ध करके राजा मुचकुंद त्रेतायुग से ऋषि के रूप में सोए हुए थे।


राजा मुचुकंद को इंद्र ने वरदान दिया था कि जो भी इंसान तुम्हें नींद से जगाएगा वो जलकर खाक हो जाएगा। ऐसे में भगवान कृष्ण कालयवन को अपने पीछे भगाते-भगाते उस गुफा तक ले आए। गुफा में भगवान कृष्ण ने राजा मुचुकंद पर अपना पीतांबर डाल दिया और छिप कर बैठ गए। कालयवन ने उन्हें कृष्ण समझकर जब लात मारकर जगाया तब ऋषि के रूप में सोए राजा मुचुकंद के जागते ही कालयवन जलकर खाक हो गया। 


मंगलवार, 11 अगस्त 2020

Police Encounter : 'ब्राह्मण हो तो यूपी में बच के रहना'


- पुलिस एनकाउंटर में मारे गये हनुमान पांडेय के पिता ने पुलिस पर उठाये सवाल

- हर बार क्यों पुलिस एनकाउंटर खड़े हो जाते हैं सवाल: जितिन प्रसाद

- सरकार ऐसा काम न करे, ब्राह्मण समाज असुरक्षित महसूस करे : मायावती

लखनऊ. कानपुर के बिकरू कांड के बाद योगी सरकार हर जिले में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। पुलिस के ऑपेशन क्लीन के तहत अब तक कई ईनामी बदमाश ढेर किये गये हैं। रविवार को लखनऊ में पुलिस ने भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड में आरोपित इनामी बदमाश राकेश पांडेय उर्फ हनुमान को ढेर कर दिया। एनकाउंटर को लेकर हनुमान पांडेय के पिता आर्मी से सेवानिवृत्त बालदत्त पांडेय ने यूपी एसटीएफ पर सवाल उठाए हैं। जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार पर एक बार फिर ब्राह्मणों के खिलाफ कार्रवाई के आरोप लग रहे हैं। एनकाउंटर की सीबीआई जांच के लिए मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है। अधिवक्ता ने सर्वोच्च याचिका में दाखिल जनहित याचिका में एनकाउंर में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की है।


पूर्व केंद्रीय मंत्री व यूपी कांग्रेस के युवा नेता जितिन प्रसाद ने पुलिस एनकाउंटर में मारे गये हनुमान पांडेय के पिता का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है कि अपराधियों पर कार्यवाही हो इससे मैं भी सहमत हूं। लेकिन हमारे प्रदेश में जो कार्यवाही हो रही है उस पर हर बार सवाल क्यों खड़े हो जाते हैं? इस पर भी विचार करना पड़ेगा। जैसा इस प्रकरण में भी सुनाई पड़ रहा है।


ब्राह्मण हो तो बच के रहना : अंशू अवस्थी

पूर्व प्रवक्ता व कांग्रेस नेता अंशू अवस्थी ने पुलिस एनकाउंटर में मारे गये हनुमान पांडेय के पिता का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है कि ब्राह्मण हो तो बच के रहना सरकार संविधान और कानून से नहीं। सीधे हत्या कराएगी। घर से उठाया और हत्या करा दी। वाह!


हनुमान पांडेय के पिता ने एनकाउंटर पर उठाये सवाल

बालदत्त पांडेय ने कहा कि पुलिस उनके बेटे लखनऊ स्थित आवास से शनिवार की रात तीन बजे उठाकर ले गई और एनकाउंटर कर दिया। हनुमान लखनऊ में अपनी मां का इलाज करा रहा था। इसी को लेकर आता जाता रहा। उस पर एक लाख का ईनाम कब घोषित हुआ, कभी मामला सामने नहीं आया। ज्यादातर केस से वह बरी हो गया था और बाहर था। हनुमान के पिता ने कहा है कि मेरे बेटे को घर से ले जाकर मार दिया। अब वे यूपी एसटीएफ को कोर्ट में घसीटेंगे।


यूपी में यह क्या हो रहा है? जितिन प्रसाद

'ब्रह्म चेतना संवाद' के जरिए ब्राह्मणों की आवाज बनने की कोशिश कर रहे जितिन प्रसाद एक और ट्वीट में बाहुबली विधायक विजय मिश्रा वीडियो शेयर करते हुए कहते हैं उत्तर प्रदेश में में यह क्या हो रहा है? जहां पं. विजय मिश्रा जैसे विधायक भी अपने को असुरक्षित समझ रहे हैं! क्या एक जाति विशेष में अब जन्म लेना भी असुरक्षा का कारण बनने लगा है? विजय मिश्रा भदोही जिले की ज्ञानपुर विधानसभा सीट से लगातार चौथी बार विधायक चुने गये हैं। विधायक पर जबरन जमीन कब्जाने का आरोप है। मामले में बाहुबली विधायक विजय मिश्रा, उनकी एमएलसी पत्नी और बेटे पर मकान में जबरन रहने और कब्जा करने के आरोप में एक और मुकदमा दर्ज कराया गया है। विधायक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले को अपने खिलाफ बड़ी साजिश बताया है। 


सरकार ऐसा काम न करे, ब्राह्मण समाज असुरक्षित महसूस करे : मायावती

बिकरू हत्याकांड के बाद से पुलिस की कार्रवाई उठ रहे सवालों के बीच बहुजन समाज पार्टी ने ट्वीट करते हुए कहा था कि बसपा का मानना है कि किसी गलत व्यक्ति के अपराध की सजा के तौर पर उसके पूरे समाज को प्रताड़ित व कटघरे में नहीं खड़ा करना चाहिए। एक और ट्वीट में मायावती ने कहा कि सरकार ऐसा कोई काम नहीं करे जिससे अब ब्राह्मण समाज भी यहां अपने आपको भयभीत, आतंकित व असुरक्षित महसूस करे।


..और शुरू हो गई ब्राह्मण पॉलिटिक्स

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण पॉलिटिक्स शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने परशुराम भगवान की लखनऊ में 108 फीट ऊंची मूर्ति लगाने का ऐलान कर यूपी के 11 करोड़ ब्राह्मण मतदाताओं को लुभाने का प्रयास किया। अगले ही दिन बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि सरकार बनने पर बहुजन समाज पार्टी परशुराम की भव्य मूर्ति लगवाएगी। जितिन प्रसाद की अगुआई में कांग्रेस पहले ही ब्राह्मण वोटरों पर निशाना साध रही है। वहीं, बीजेपी ने विपक्षी दलों के ब्राह्मण प्रेम को सिर्फ दिखावा बताया है।

शुक्रवार, 7 अगस्त 2020

Covid 19 : कोरोना संक्रमण को रोकने में कारगर है Ivermectin दवा, यूपी सरकार ने जारी किया शासनादेश



- COVID-19 के इलाज में कारगर है Ivermectin दवा, योगी आदित्यनाथ सरकार ने जारी किया शासनादेश

- Corona Positive के संपर्क में आये, हल्के लक्षण वाले और स्वास्थकर्मियों को आइवरमेक्टिन दवा देने की सलाह

- गर्भवती व धात्री महिलाओं और दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को Ivermectin Tablet नहीं देने के निर्देश

- कोरोना संक्रमण रोकने और Corona Treatment में आइवरमेक्टिन के साथ Doxycycline दवा लेने के निर्देश


कोरोना (Corona Virus) के खात्मे के लिए वैसे अभी तो कोई दवा नहीं बनी है, लेकिन आइवरमेक्टिन (Ivermectin) टैबलेट कोरोना संक्रमण के बचाव और उपचार में कारगर है। 50 वर्ष पहले पेट के कीड़ों को मारने की दवा से रोकोना संक्रमण को रोका जा सकता है। हल्के लक्षण वाले मरीज इससे स्वस्थ हो सकते हैं। कोरोना (Covid 19) के इलाज को लेकर यूपी सरकार (UP Government) ने महत्वपूर्ण शासनादेश जारी किया है, जिसमें आइवरमेक्टिन टैबलेट को कोरोना इलाज (Corona Treatment) में कारगर दवा बताया गया है।


कोविड-19 के संक्रमण (Covid 19 Infection) से बचाव के लिए आइवरमेक्टिन टैबलेट को दवा के तौर पर इस्तेमाल करने की मंजूरी मिल गई है। उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने शासनादेश जारी करते हुए दवा के इस्तेमाल के तरीकों के बारे में भी जानकारी दी। शासनादेश में बताया गया है कि कोरोना पॉजिटिव (Corona Positive) के संपर्क में आये व कोरोना के उपचार में लगे स्वास्थ्य कर्मियों में संक्रमण से बचाव के लिए आइवरमेक्टिन दवा दी जाये। इसके अलावा एसिम्प्टोमेटिक या हल्के लक्षणों वाले कोविड-19 के पुष्ट रोगियों टैबलेट दी जा सकती है। साथ ही डॉक्सीसाइक्लीन (Doxycycline) दवा देने की सलाह दी है। यह दवा कितनी बार और कितनी मात्रा में दी जानी है, जारी शासनादेश में बताया गया है।


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इनको दवा देने पर प्रतिबंध

प्रदेश सरकार की ओर से जारी शासनादेश में बताया गया है कि गर्भवती एवं धात्री महिलाओं व दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को आइवरमेक्टिन दवा नहीं दी जाएगी। इसके अलावा इन्हें डॉक्सीसाइक्लीन दवा भी नहीं देने को कहा गया है।


1970 में हुई थी इस दवा की खोज

आइवरमेक्टिन की खोज वर्ष 1970 में हुई थी। पेट में कृमिनाशक के तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली इस दवा के कई फायदे हैं। रिवर ब्लाइंडनेस, एस्कारिया सिस, फाइले रिया, इंफ्लूएंजा, डेंगू के मरीजों में भी यह दवा उपयोगी साबित हुई है। अब आइवरमेक्टिन दवा कोरोना वायरस के रोकथाम में भी असरदार बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि आइवरमेक्टिन दवा कोशिका से वायरस को न्यूक्लियस में पहुंचने से रोक देती है। ऐसे में वायरस मरीज के डीएनए से मिलकर मल्टी फिकेशन नहीं कर पाता है। लिहाजा, इस सस्ती दवा के जरिए कई मरीजों की जिंदगी बचाई जा सकती है।


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सोमवार, 3 अगस्त 2020

चिंताजनक : लखनऊ में सड़कों पर घूम रहे हैं कोरोना मरीज


- पॉजिटिव रिपोर्ट आते ही लखनऊ में गायब हो गए 2290 कोरोना संक्रमित
- लखनऊ पुलिस की सर्विलांस टीम कोरोना संक्रमित मरीजों की कर रहा है तलाश
- ट्विटर पर यूजर्स ने अव्यवस्थाओं पर उठाये सवाल, कहा- पर उपदेश कुशल बहुतेरे..

ये तथ्य बेहद चिंताजनक हैं। लखनऊ में गली-गली और मोहल्लों में कोरोना मरीज घूम रहे हैं। कब-कौन, कैसे और कहां संक्रमित कर जाये आपको पता भी नहीं चलेगा। राजधानी से बीते 10 दिनों में 2290 कोरोना पॉटिजिव मरीज गायब हो गये, जिनकी कोई जानकारी नहीं है। यह सब लखनऊ में छिपे हुए हैं। 23 से 31 जुलाई के बीच इन मरीजों की जांच हुई थी। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद से सभी गायब हैं। प्रशासन ने जब इनके नाम और पते खंगाले तो वे फर्जी निकले। पुलिस का विशेष दस्ता इनकी तलाश कर रहा है।

पुलिस की सर्विलांस टीम ने 1171 कोरोना पॉजिटिव मरीजों को तलाश लिया है, जबकि 1119 मरीज अभी भी गायब हैं। तलाशे गये सभी मरीजों को हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है, गलत जानकारी देने के आरोप में इन कार्रवाई की जाएगी। पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडे के मुताबिक कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए हजारों की संख्या में जांच की गई थी। कई जगह कैंप लगाकर सैम्पल लिए गये इस दौरान लोगों ने फॉर्म पर गलत, नाम, पता और मोबाइल नंबर भरा। 


लोग बोले- पर उपदेश कुशल बहुतेरे...
कोरोना मरीज क्यों गायब हैं? इसे लेकर सोशल मीडिया लोग जहां चिंता जाहिर कर रहे हैं वहीं, अवस्वस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं। ट्विटर यूजर Shyaamjee Shuklaa लिखते हैं कि इसका कारण स्पष्ट है। सरकारी अव्यवस्था...। न स्तरीय भोजन-पानी है और न साफ-सफाई। मृत्यु ऐसे भी है और वैसे भी! पर उपदेश कुशल बहुतेरे...। सरकार अपनी व्यवस्था का स्तर सुधारे। जब लखनऊ का ये हाल है, छोटे जिलों का क्या होगा? एक और ट्विटर यूजर Adv. Arun Dixit कहते हैं उनकी बड़ी मजबूरी है। अब तक इन पॉजिटिव मरीजों को सरकार के द्वारा कोई सहायता तो मिली नहीं इसलिए वह अपनी स्वयं व्यवस्था कर लेते हैं और अंडरग्राउंड हो जा रहे हैं। लोग ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि सरकार जबरदस्ती लोगों को जुगाड़ू और सुविधा रहित क्वारंटाइन सेन्टर में डाल दे रही है। लोगों को लगता है कि घर पर बेहतर देखभाल हो सकती है। मेरे एक मित्र जो अभी क्वारंटाइन सेन्टर में हैं, बोल रहे थे कि यहां तो मैं और बीमार हो जाऊंगा।

ये क्या हो रहा है योगी सरकार में : आप
आम आदमी पार्टी के सांसद व यूपी प्रभारी संजय सिंह ने मामले में ट्वीट करते हुए कहा कि ये हो क्या रहा है योगी सरकार में? हर जिले में मरीजों के लापता होने की खबरें आ रही हैं। अब राजधानी लखनऊ में भी 2290 कोरोना मरीजों का अता-पता न होने की खबरें आ रही हैं। इतनी बड़ी खबर पर राष्ट्रीय मीडिया खामोश क्यों है?

कोविड-19 प्रोटोकॉल फॉलो न करने पर जिला प्रशासन ने वसूले 27 लाख रुपए
लखनऊ में रविवार को 189 व्यक्तियों ने कोविड-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया, जिनसे जुर्माने के तौर पर 70 हजार रुपए वसूले गये जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने बताया कि राजधानी में अब तक प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने वाले 7179 लोगों से 27,13,667 रुपए का जुर्माना वसूला जा चुका है।

रविवार, 2 अगस्त 2020

Raksha Bandhan 2020 : शुभ मुहूर्त में ऐसे बांधें भाइयों को राखी, मिलेगा शुभ फल



- 29 साल बाद इस रक्षाबंधन पर बन रहा विशेष योग
- 3 अगस्त को सुबह 8:28 मिनट से रात 8:20 मिनट तक राखी बांधने का है शुभ मुहूर्त
- भाइयों की कलाई पर काले रंग का धागा, टूटी व प्लास्टिक और अशुभ चिन्हों वाली राखी न बांधें बहनें

तीन अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनके सुखमय जीवन की कामना करती हैं। बदले में भाई भी बहनों को गिफ्ट देकर आजीवन उनकी रक्षा का वादा करते हैं। राखी बांधते समय शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखना चाहिए। रक्षाबंधन पर सोमवार को सुबह 8:28 मिनट से रात 8:20 मिनट तक राखी बांधने का शुभ मुहूर्त है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, ध्यान रखें कि भाई की दाहिनी कलाई पर ही राखी बांधें। राखी बांधते समय बहनों का मुंह पश्चिम दिशा की ओर और भाई का मुंह पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। ऐसा करने से शुभ फल मिलता है।

ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि शुभता के लिए भाई को तिलक और राखी बांधते समय बहनों को 'येन बद्धो बलिराजा, दानवेन्द्रो महाबलः तेनत्वाम प्रति बद्धनामि रक्षे, माचल-माचल।' मंत्र का जाप करना चाहिए। इससे विशेष फल की प्राप्ति होती है। राखी को बांधने के बाद भाई की आरती उतारना और मीठा खिलाना उत्तम माना गया है। राखी बांधते समय बहनें ध्यान रखें कि वह भाइयों की कलाई में काले रंग का धागा, टूटी या खंडित राखी, प्लास्टिक की राखी और अशुभ चिन्हों वाली राखी नहीं बांधे। ऐसा करना दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

29 वर्ष बाद रक्षाबंधन पर बन रहा विशेष संयोग
इस बार रक्षाबंधन पर महासंयोग के कारण भाई-बहनों को विशेष लाभ मिलेंगे। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, 29 वर्ष बाद इस बार रक्षाबंधन पर्व परविशेष अमृत योग बन रहा है। सावन के आखिरी सोमवार को पूर्णिमा पर श्रावण नक्षत्र भी है, जिससे इस दिन प्रीतियोग, आयुष्मान योग और सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है जो इस दिन को विशेष और दुर्लभ बनाता है। इस शुभ संयोग में पूजा करने से पूजा का फल दोगुना मिलता है। यह कहना है ज्योतिषाचार्य डॉ. शिवबहादुर तिवारी का। साथ ही उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन पर बहनों को किस तरह से भाई की कलाई पर राखी बांधनी चाहिए, जो सबके लिए फलदायी हो। 

ज्योतिषाचार्यों का कहना है किसावन के आखिरी सोमवार को ही पूर्णिमा तिथि है। इस दिन चंद्रमा के मकर राशि में होने से प्रीति योग बन रहा है। यह शुभ संयोग सुबह 6 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। इसके बाद आयुष्मान योग लग जाएगा। पूर्णिमा और सोमवार और रक्षाबंधन के इस अद्भुत संयोग को सौम्या तिथि माना जाता है। मान्यता है कि सावन के आखिरी सोमवार के दिन भगवान शिव और माता पार्वती धरती का भ्रमण करने के साथ ही अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।

शनिवार, 1 अगस्त 2020

20 फीसदी छूट सिर्फ बहाना है, असली मकसद तो पूरी फीस लेना है



लखनऊ के सिटी मांटेसरी, सेंट जोजफ स्कूल, लखनऊ पब्लिक स्कूल, क्राइस्ट चर्च कॉलेज, लामार्टिनियर गर्ल्स, इरम कॉलेज, एग्जान मांटेसरी समेत कई बड़े स्कूलों ने अभिभावकों को फीस में 20 फीसदी छूट का ऑफर दिया है। कोरोना संकट के चलते स्कूल-कॉलेज बंद हैं। फीस नहीं आने से स्कूलों पर संकट का साया मंडरा रहा है। ऐसे में अन एडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने मीटिंग कर अभिभावकों 20 फीसदी तक फीस में छूट का ऑफर दिया है। साथ ही अभिभावकों के लिए चेतावनी भी है, जिसे हाईलाइट नहीं किया गया। वह यह है कि अगर आपने 10 अगस्त तक अपने बच्चे की फीस नहीं जमा की तो उसे ऑनलाइन कक्षाओं से निकाल दिया जाएगा। अगर बिजनेसमैन हैं या फिर नौकरी पेशा तो छूट के बारे में सोचिये भी मत। सिर्फ फीस जमा कर दीजिए। इस छूट का लाभ लेने के लिए आपको बताना होगा कि कोरोना संक्रमण की वजह से आप वित्तीय संकट झेल रहे हैं...

एसोशिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि स्कूल फीस में 20 फीसदी रियायत लेने के लिए अभिभावकों को स्कूल मैनेजमेंट को लिखित में आवेदन करना होगा। इसके बाद अभिभावकों को उनकी स्थिति देखकर छूट दी जाएगी। उन्होंने बताया कि अगर किसी अभिभावक के दो से तीन बच्चे पढ़ रहे तो उनको 20 प्रतिशत और किसी अभिभावक का सिर्फ एक ही बच्चा है तो उसे 20 प्रतिशत से कम की छूट दी जाएगी।

शुक्रवार, 31 जुलाई 2020

Covid 19: कर लीजिए ये तीन काम, आपका बाल-बांका भी नहीं कर पाएगा कोरोना वायरस



संभल जाइए। स्थिति बहुत भयावह है। मकसद आपको डराना नहीं। सचेत करना है। उत्तर प्रदेश में तेजी से कोरोना मरीज बढ़ रहे हैं। वह दिन दूर नहीं जब हम-आप या फिर हमारा कोई करीबी इसकी चपेट में आ सकते हैं। भगवान न करे ऐसा हो। फिर भी अगर ऐसा हुआ तो आप इस मुश्किल समय का सामना करने के लिए कितना तैयार हैं? अगर कोरोना की चपेट में आये तो आर्थिक, शारीरिक और मानसिक पीड़ा से गुजरना होगा। इसलिए खुद को तैयार करें। तुरंत हेल्थ इंश्योरेंस कराएं, जिसमें कोरोना कवर हो। मुसीबत के समय यह पॉलिसी आपको आर्थिक नुकसान से बचाएगी। चूंकि कोरोना की अभी कोई दवा नहीं बनी है, यह सिर्फ आपके इम्युनिटी पर निर्भर करता है। ऐसे में जरूरी है कि अपना इम्यून सिस्टम मजबूत रखें जिससे आप कोरोना को हरा पाएंगे। इसके अलावा मानसिक दिक्कत तो होगी, लेकिन अगर आपने पहले से सोच रखा है तो सोच मजबूत होगी और निश्चित आपकी सकारात्मकता से कोरोना पस्त हो जाएगा। तो जरूरी है उन दिनों के लिए आर्थिक, शारीरिक और मानसिक मजबूती बनाए रखें। इसके अलावा कड़ाई से फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करें। मास्क पहनें और लगातार हाथ धुलते रहें।

अस्पतालों की व्यवस्था किसी से छिपी नहीं है। सरकार के तमाम दावों के बावजूद बेकदरी से कोरोना मरीजों की मौत न केवल चिंताजनक है, बल्कि हमें और आपको डरना भी चाहिए। प्राइवेट अस्पतालों में भी बेड़ का टोटा है। अगर हैं भी तो इनमें इलाज कराना आम आदमी के बस की बात नहीं है। कोरोना संकट के नाम कंपनियां बड़ी संख्या में कर्मचारियों को बाहर कर चुकी हैं, जो बचे हैं, उनसे डबल-ट्रिपल काम लिया जा रहा है। ऐसे में अगर आपकी नौकरी बची है तो कट-पिट कर जितना भी पैसा मिल रहा है, मुश्किल दिनों के लिए उसे भी बचाकर रखिए। साथ ही आय के विकल्प भी तलाशते रहिए।

एक दिन रिकॉर्ड 4,453 कोरोना मरीज 
उत्तर प्रदेश में जुलाई महीने से प्रतिदिन तकरीबन 3000 मामले सामने आ रहे हैं। महीने के आखिरी दिन यानी 31 जुलाई को 24 घंटे में 4,453 नए कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आ गए। यह एक दिन में मिले संक्रमित मरीजों रिकार्ड आंकड़ा है। उत्तर प्रदेश में अब तक कुल पॉजिटिव केस 85 हजार के पार जा चुके हैं। इनमें करीब 35 हजार एक्टिव केस हैं। अब तक 1630 संक्रमितों की मौत हो चुकी है जबकि 48 हजार से अधिक मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं।