शुक्रवार, 7 अगस्त 2020

Covid 19 : कोरोना संक्रमण को रोकने में कारगर है Ivermectin दवा, यूपी सरकार ने जारी किया शासनादेश



- COVID-19 के इलाज में कारगर है Ivermectin दवा, योगी आदित्यनाथ सरकार ने जारी किया शासनादेश

- Corona Positive के संपर्क में आये, हल्के लक्षण वाले और स्वास्थकर्मियों को आइवरमेक्टिन दवा देने की सलाह

- गर्भवती व धात्री महिलाओं और दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को Ivermectin Tablet नहीं देने के निर्देश

- कोरोना संक्रमण रोकने और Corona Treatment में आइवरमेक्टिन के साथ Doxycycline दवा लेने के निर्देश


कोरोना (Corona Virus) के खात्मे के लिए वैसे अभी तो कोई दवा नहीं बनी है, लेकिन आइवरमेक्टिन (Ivermectin) टैबलेट कोरोना संक्रमण के बचाव और उपचार में कारगर है। 50 वर्ष पहले पेट के कीड़ों को मारने की दवा से रोकोना संक्रमण को रोका जा सकता है। हल्के लक्षण वाले मरीज इससे स्वस्थ हो सकते हैं। कोरोना (Covid 19) के इलाज को लेकर यूपी सरकार (UP Government) ने महत्वपूर्ण शासनादेश जारी किया है, जिसमें आइवरमेक्टिन टैबलेट को कोरोना इलाज (Corona Treatment) में कारगर दवा बताया गया है।


कोविड-19 के संक्रमण (Covid 19 Infection) से बचाव के लिए आइवरमेक्टिन टैबलेट को दवा के तौर पर इस्तेमाल करने की मंजूरी मिल गई है। उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने शासनादेश जारी करते हुए दवा के इस्तेमाल के तरीकों के बारे में भी जानकारी दी। शासनादेश में बताया गया है कि कोरोना पॉजिटिव (Corona Positive) के संपर्क में आये व कोरोना के उपचार में लगे स्वास्थ्य कर्मियों में संक्रमण से बचाव के लिए आइवरमेक्टिन दवा दी जाये। इसके अलावा एसिम्प्टोमेटिक या हल्के लक्षणों वाले कोविड-19 के पुष्ट रोगियों टैबलेट दी जा सकती है। साथ ही डॉक्सीसाइक्लीन (Doxycycline) दवा देने की सलाह दी है। यह दवा कितनी बार और कितनी मात्रा में दी जानी है, जारी शासनादेश में बताया गया है।


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इनको दवा देने पर प्रतिबंध

प्रदेश सरकार की ओर से जारी शासनादेश में बताया गया है कि गर्भवती एवं धात्री महिलाओं व दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को आइवरमेक्टिन दवा नहीं दी जाएगी। इसके अलावा इन्हें डॉक्सीसाइक्लीन दवा भी नहीं देने को कहा गया है।


1970 में हुई थी इस दवा की खोज

आइवरमेक्टिन की खोज वर्ष 1970 में हुई थी। पेट में कृमिनाशक के तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली इस दवा के कई फायदे हैं। रिवर ब्लाइंडनेस, एस्कारिया सिस, फाइले रिया, इंफ्लूएंजा, डेंगू के मरीजों में भी यह दवा उपयोगी साबित हुई है। अब आइवरमेक्टिन दवा कोरोना वायरस के रोकथाम में भी असरदार बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि आइवरमेक्टिन दवा कोशिका से वायरस को न्यूक्लियस में पहुंचने से रोक देती है। ऐसे में वायरस मरीज के डीएनए से मिलकर मल्टी फिकेशन नहीं कर पाता है। लिहाजा, इस सस्ती दवा के जरिए कई मरीजों की जिंदगी बचाई जा सकती है।


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सोमवार, 3 अगस्त 2020

चिंताजनक : लखनऊ में सड़कों पर घूम रहे हैं कोरोना मरीज


- पॉजिटिव रिपोर्ट आते ही लखनऊ में गायब हो गए 2290 कोरोना संक्रमित
- लखनऊ पुलिस की सर्विलांस टीम कोरोना संक्रमित मरीजों की कर रहा है तलाश
- ट्विटर पर यूजर्स ने अव्यवस्थाओं पर उठाये सवाल, कहा- पर उपदेश कुशल बहुतेरे..

ये तथ्य बेहद चिंताजनक हैं। लखनऊ में गली-गली और मोहल्लों में कोरोना मरीज घूम रहे हैं। कब-कौन, कैसे और कहां संक्रमित कर जाये आपको पता भी नहीं चलेगा। राजधानी से बीते 10 दिनों में 2290 कोरोना पॉटिजिव मरीज गायब हो गये, जिनकी कोई जानकारी नहीं है। यह सब लखनऊ में छिपे हुए हैं। 23 से 31 जुलाई के बीच इन मरीजों की जांच हुई थी। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद से सभी गायब हैं। प्रशासन ने जब इनके नाम और पते खंगाले तो वे फर्जी निकले। पुलिस का विशेष दस्ता इनकी तलाश कर रहा है।

पुलिस की सर्विलांस टीम ने 1171 कोरोना पॉजिटिव मरीजों को तलाश लिया है, जबकि 1119 मरीज अभी भी गायब हैं। तलाशे गये सभी मरीजों को हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है, गलत जानकारी देने के आरोप में इन कार्रवाई की जाएगी। पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडे के मुताबिक कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए हजारों की संख्या में जांच की गई थी। कई जगह कैंप लगाकर सैम्पल लिए गये इस दौरान लोगों ने फॉर्म पर गलत, नाम, पता और मोबाइल नंबर भरा। 


लोग बोले- पर उपदेश कुशल बहुतेरे...
कोरोना मरीज क्यों गायब हैं? इसे लेकर सोशल मीडिया लोग जहां चिंता जाहिर कर रहे हैं वहीं, अवस्वस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं। ट्विटर यूजर Shyaamjee Shuklaa लिखते हैं कि इसका कारण स्पष्ट है। सरकारी अव्यवस्था...। न स्तरीय भोजन-पानी है और न साफ-सफाई। मृत्यु ऐसे भी है और वैसे भी! पर उपदेश कुशल बहुतेरे...। सरकार अपनी व्यवस्था का स्तर सुधारे। जब लखनऊ का ये हाल है, छोटे जिलों का क्या होगा? एक और ट्विटर यूजर Adv. Arun Dixit कहते हैं उनकी बड़ी मजबूरी है। अब तक इन पॉजिटिव मरीजों को सरकार के द्वारा कोई सहायता तो मिली नहीं इसलिए वह अपनी स्वयं व्यवस्था कर लेते हैं और अंडरग्राउंड हो जा रहे हैं। लोग ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि सरकार जबरदस्ती लोगों को जुगाड़ू और सुविधा रहित क्वारंटाइन सेन्टर में डाल दे रही है। लोगों को लगता है कि घर पर बेहतर देखभाल हो सकती है। मेरे एक मित्र जो अभी क्वारंटाइन सेन्टर में हैं, बोल रहे थे कि यहां तो मैं और बीमार हो जाऊंगा।

ये क्या हो रहा है योगी सरकार में : आप
आम आदमी पार्टी के सांसद व यूपी प्रभारी संजय सिंह ने मामले में ट्वीट करते हुए कहा कि ये हो क्या रहा है योगी सरकार में? हर जिले में मरीजों के लापता होने की खबरें आ रही हैं। अब राजधानी लखनऊ में भी 2290 कोरोना मरीजों का अता-पता न होने की खबरें आ रही हैं। इतनी बड़ी खबर पर राष्ट्रीय मीडिया खामोश क्यों है?

कोविड-19 प्रोटोकॉल फॉलो न करने पर जिला प्रशासन ने वसूले 27 लाख रुपए
लखनऊ में रविवार को 189 व्यक्तियों ने कोविड-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया, जिनसे जुर्माने के तौर पर 70 हजार रुपए वसूले गये जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने बताया कि राजधानी में अब तक प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने वाले 7179 लोगों से 27,13,667 रुपए का जुर्माना वसूला जा चुका है।