Sunday, May 29, 2011

नौटंकी वालों की नौटंकी

मुझे अपने एक साथी रजनीश के साथ रविवार को सुबह ४ बजे ही रिसर्च के लिए कानपुर जाना था | मैंने गार्ड से बोल दिया था सुबह ३:३० बजे मुझे जगा देना क्यूंकि सुबह ४ बजे ही बस लखनऊ से फैक़ल्टी लेने के लिए जाती है | मैंने रजनीश को बड़ी मुश्किल से जगाया वो बोला थोड़ी देर में चलेंगे मैंने बोला नहीं, कुछ लोग से मिलना है जिन्होंने ११ बजे तक का समय दिया है |हम दोनों जल्दी से समय पर तैयार हो गए पता चला बस ही नही जाएगी, रजनीश को मानो मौका मिल गया बोला सुबह-सुबह जगा दिया कहा था देर से चलो पता नहीं तुम्हे क्या जल्दी रहती है आदि....
 तभी पता चला इको लखनऊ जा रही है २ गेस्ट को छोड़ने, मैंने ड्राईवर चच्चू से कहा हमें भी लिए चलो संयोग से वो भी रेलवे स्टेशन ही जा रहे थे | रेलवे स्टेशन पहुंचकर हमने चाय-नाश्ता किया और ट्रेन का इंतजार करने लगे ट्रेन निर्धारित समय से केवल १० मिनट ही लेट आई थी, अगर गाड़ी समय पर ही आ जाये तो पता कैसे चलेगा  भारतीय रेलवे क़ी विशेषता !
मुझे कानपुर में हरिश्चंद्र जी जोकि मशहूर नक्कारा वादक हैं  उनसे तथा मधु अगरवाल जी  जो क़ी गुलाब बाई जी क़ी बेटी है और एक बड़ी नौटंकी कंपनी को चला रही हैं से मिलने जाना था |
मैंने ट्रेन में बैठते ही हरिश्चंद्र जी को एक मैसज कर दिया था क़ी सर हम लोग कानपुर १० बजे तक पहुँच जायेंगे क्यूंकि उन्होंने कहा था बेटा ११ बजे तक जरुर आ जाना मैंने स्टेशन पहुंचकर तुरंत काल क़ी पर रिसीव नहीं हो सका सोचा बिजी होंगे थोड़ी देर में करूँगा | तब तक बाहर निकलकर कुछ खा-पी लिया जाये, थोड़ी देर बाद मैं उन्हें लगातार कॉल करता रहा किसी ने भी फोन रिसीव नहीं किया | मैं बहुत परेशान  था बात क्यूँ नहीं हो पा रही है फिर सोचा बाहर निकलकर थोडा टाइम पास करके कॉल करूँगा |
मैं बाहर वाले गेट क़ी क़ी तरफ पंहुचा तभी एक टी टी ने मेरे दोस्त से टिकट माँगा, हम दोनों के टिकट उसके ही पास थे उसने दे दिया| मैंने टी टी से टिकट वापस माँगा उसने मना कर दिया बोला इसे जमा ही करना पड़ेगा | मेरे पास भी समय बहुत था और कुछ-कुछ गुस्सा भी आ रहा था , एक तो मेरा फोन रिसीव नहीं हो रहा था जिसके लिए मैं कानपुर तक भागा चला आया था | मैंने कहा अगर टिकट लेना है तो जितने पैसे में मैंने ख़रीदा है आधे मुझे दे दो और टिकट रख लो ,वह बोला यह रेल सम्पत्ति है इसे बाहर नहीं ले जा सकोगे अगर ले ही जाना है तो इसकी फोटोकॉपी करवा लेते |मैंने कहा ट्रेन में तो फोटोकॉपी होती नहीं है आप टिकट दीजिये मैं करवा के आपको देता हूँ  | उसने कहा नहीं दूंगा काफी विवाद बढ़ गया उसके  एक दो साथी और आ गये थे मैंने भी ठान लिया था मैं लेकर ही जाऊंगा |
उसने कहा इतनी बहस कर रहे हो इसका जुर्माना हमें चाहिए  कौन देगा ? मैंने आश्चर्य से उसकी तरफ देखा और पूंछा ? आप सुप्रीम कोर्ट हो क्या जो आपसे मैं बहस नहीं कर सकता ? वह चुप हो गया मैंने कहा मैं यहीं पर खड़ा हूँ कोई भी यात्री बिना टिकट दिए निकलना नहीं चाहिए | वह लोगों से टिकट मांगता कोई भीड़ देखकर  निकल जाता, मैं उसकी तरफ देखकर चुपचाप मुस्कराए जा रहा था | मैं ये सोंचे जा रहा था क़ी क्या सच में
इन लोगों को रेलवे की इतनी फिकर है ? ये किस रेल सम्पत्ति की बात कर रहे हैं ? उसने मेरी तरफ देखा मैं पहले की तरह ही मुस्कराए जा रहा था , उसने मेरा टिकट वापस दे दिया बोला ये लो और जाओ |
 मेरा काफी समय पास हो चुका था मैंने फिर से फोन लगाया लेकिन किसी ने भी रिसीव तक नहीं किया मैं बहुत परेशान था | उन्होंने शनिवार को इतना बताया था की किदवई नगर पहुँच कर कॉल कर लेना  हम आ जायेंगे | हम दोनों चिलचिलाती धुप में टैक्सी से इधर-उधर भटकते रहे फोन करते रहे पर कोई जवाब नहीं आया | आखिर मधुजी की कॉल रिसीव हुयी कोई उनका पी. ए. बोल रहा था बोला १ घंटे बाद करना, १ घंटे बाद किया तो पता चला २५ मिनट बाद'२५ मिनट बाद किया रिसीव ही नहीं हुआ | मैंने एक मैसज उनके सेल पर छोड़ दिया और निराश दुखी मन से वापस जाने के लिए बस-अड्डे की तरफ चल पड़ा तभी मधु जी की कॉल आई मेरी तो जान में जान आ गयी |  उन्होंने बताया आज मैं जरुरी काम से अपने हसबैंड के साथ बाहर जा रही  हूँ आज नहीं मिल सकती |
मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था लोग ऐसे क्यूँ होते हैं जब मिलना नहीं था बुलाया ही क्यूँ ?  हरिश्चंद्र जी जिन्होंने कहा था बेटा ११ बजे तक आ जरुर जाना ,उन्होंने तो फोन तक नहीं रिसीव  किया | कम से कम बात तो कर लेना चाहिए था |मेरी समझ में आ रहा था  क्यूँ पिछले ४० वर्षों से  नौटंकी के अच्छे कलाकार होने के बावजूद तंगी हालत से गुजर रहे  हैं |जिसे अपने और दूसरे के समय की चिंता न हो वह कभी भी आगे नहीं बढ़ सकता |
हम रात तक अपने इंस्टिट्यूट वापस आ गये थे और मैंने सोच लिया जरुरत पड़ने पर मैं शूट के लिए लखनऊ,इलाहाबाद तथा मथुरा में चला जाऊंगा पर कभी कानपुर नहीं जाऊंगा
  
         

    

Friday, May 20, 2011

My Friends

1-Sangita Yadav Interview
                                                   http://www.youtube.com/watch?v=1hSgAEmV9Tg

2-Ram Naresh Yadav Interview
                                                    http://www.youtube.com/watch?v=6zmQXDU3aX0&feature=related

Friday, May 6, 2011

नौटंकी पर संकट

प्राचीन समय से ही नौटंकी एक पावरफुल विधा रही है,इसने समाज के हर वर्ग को प्रभावित किया है |सोचने वाली बात यह है की नौटंकी जब इतनी पावरफुल विधा है तो धीरे-धीरे यह गायब क्यूँ होती जा रही है | जो लोग इसको  आगे बढ़ने का नारा देते हैं और इसे आगे बढ़ाना चाहते हैं ,वही चुप  होजाते हैं क्यूँ ?
जो सब बुद्धिजीवी मिलकर निष्कर्ष निकलते हैं उस पर वही लोग अमल क्यूँ नहीं करते |हम दूरदर्शन तथा अन्य माध्यमो को इसके लिए दोषी क्यूँ मानते हैं,जबकि अन्य राज्यों की विधाओं पर इतना संकट नहीं आया |नौटंकी में दोहा ,चौबोला ,रेख्ता,कड़ा ,झूलना ,भजन ,आल्हा ,छंद  आदि विभिन्न तत्वों का अद्भुत समिक्श्रण है ,इस महान विधा का किन्ही कारणों से अस्तित्व समाप्त होना बहुत ही दुखद होगा |
फिल्मो के साथ नौटंकी में जो समस्या है वह है इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना | जैसे फिल्म की एक कॉपी को बैग में डालकर आप कही भी ले जा सकते हैं और एक साथ सारे विश्व में देखा जा सकता है जबकि नौटंकी को सारी जगहों पर लोग एक साथ नहीं देख सकते | पर एक बात बताना नही भूलूंगा नौटंकी की अपनी शक्ति भी है, गाँव के बीच जहाँ नक्कारा बजा किलोमीटर दूर से लोग खिंचे चले आते हैं |
आज जो नौटंकी की दुर्दशा हो रही है उसका प्रमुख कारण अच्छी नौटंकी लेखन का अभाव भी है,नौटंकी लेखन का छंद रचना पर अधिकार होना चाहिए |प्राचीन समय से लेकर अभी तक नौटंकी लेखन का आधार पोराणिक,धार्मिक व ऐतिहासिक रहा है |आज निश्चित रूप  से स्थितियाँ बदली हैं हर कोई यथार्थ को देखना चाहता है जो बहुत ही मुश्किल काम है| बहुत सी यथार्थ बातें आप सीधे-सीधे नहीं कह सकते जैसे राजनीति आदि पर | विशेषकर नौटंकी  कलाकारों के लिए स्थिति और भी गंभीर है क्यूंकि ज्यादातर  वो अशिक्षित और आर्थिक रूप से कमजोर हैं | इसलिए बात को सीधे-सीधे न कहकर समसामयिक प्रश्नों को पोराणिक  कथाओं के माध्यम से कहा जाता है तो जनमानस स्वीकार कर लेता है |
आजकल के लेखक को नौटंकी की आंतरिक स्थिति को समझते हुए एक नाटककार की भूमिका का पालन करते हुए नौटंकी लिखना पड़ेगा  | अब आवश्यकता इस बात की है लेखक आधुनिकता के हिसाब से नौटंकी का भी ज्ञान रखे  तो ही अच्छी नौटंकी लिखी जा सकेगी    |
नौटंकी एक जबरदस्त विधा है कोई अच्छे से इसे करके तो देखे  ! लेकिन लोग करना नहीं चाहते |
इस विधा को बचाने के लिए निश्चित तौर पर जमकर काम करना होगा वरना धीरे-धीरे नौटंकी  की लोप होता जायेगा ,अगर यह विधा उत्तरप्रदेश से किसी तरह समाप्त हो गयी तो हमारे पास अपना कुछ नहीं बचेगा |
अतः हम सबको नौटंकी जैसी प्राचीन और सशक्त विधा को बचाने के लिए हरसम्भव प्रयास करना होगा,हर उस निष्कर्ष पर जिसे सर्व-सम्मति से नौटंकी के विकास के लिए माना गया हो,को अमल में लाना होगा और सरकार को भी इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे वरना नौटंकी जैसी हमारी प्राचीन संस्क्रति का लोप हो जायेगा और हम कुछ भी नही कर सकेंगे |