गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020

GBD Global Report : भारत विश्व का सबसे प्रदूषित, 100% लोग प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर

 


- जीबीडी रिपोर्ट का दावा- भारत की 100 प्रतिशत आबादी प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर

- पिछले वर्षों की तुलना में भारत में 2019 में प्रति व्यक्ति प्रदूषण का दबाव 6.5 माइक्रो ग्राम बढ़ा

- रिपोर्ट का दावा, दुनिया भर में वायु प्रदूषण जनित बीमारियों के कारण 2019 में हुईं कूल 67 लाख मौतें

लखनऊ. 21 अक्टूबर को वायु प्रदूषण के आंकड़ों और तथ्यों के साथ ग्लोबल बर्डन ऑफ डीजीस की वैश्विक रिपोर्ट दुनिया भर में एक साथ जारी की गयी। वर्ष 2019 के अध्ययन के आधार पर जारी की गयी इस रिपोर्ट में दुनिया भर के 116 देशों में लगे 10 हज़ार 4 सौ 8 वायु प्रदूषण मापन इकाईयों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर इस रिपोर्ट का संकलन और प्रकाशन किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर भारत विश्व में प्रदूषित देशों के पायदान में पहले नंबर पर पाया गया, जहां देश की सम्पूर्ण आबादी वायु प्रदूषण के चपेट में जीवन जीने को बाध्य है।

जीबीडी की यह वार्षिक वैश्विक रिपोर्ट हेल्थ इफेक्ट इंस्टिट्यूट और इंस्टिट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवलुएशन द्वारा हर वर्ष साझे रूप से जारी की जाती है। सौ से अधिक देशों में वर्ष भर मिले वायु गुणवत्ता के आंकड़ों के आधार पर जारी होने वाली यह रिपोर्ट तथ्यात्मक और भरोसेमंद मानी जाती है।

इस रिपोर्ट में दिए गए तथ्यों के बारे में विस्तार से बताते हुए क्लाइमेट एजेंडा की निदेशक एकता शेखर ने बताया 'भारत में पिछले एक दशक में वायु प्रदूषण का स्तर निरंतर बढ़ता जा रहा है, जीबीडी की यह ताजा तरीन रिपोर्ट भी बताती है कि देश में वायु प्रदूषण का प्रति व्यक्ति औसत 6.5 माइक्रोग्राम बढ़ा है। और विश्व के 116 देशों की तुलना में सबसे ज्यादा बढ़कर 83 माइक्रोग्राम प्रति व्यक्ति तक पहुंच चुका है, जिसे भारत सरकार के मानकों के अनुसार अधिकतम 60 माइक्रोग्राम तक होना चाहिये था। यह आंकड़े बताते हैं कि भारत की सौ प्रतिशत आबादी भारत सरकार के मानकों के आधार पर भी और विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के आधार पर भी प्रदूषित हवा में सांस लेने के मजबूर हो चुकी है।'

दुनिया के यह 6 देश हैं सबसे प्रदूषित

क्लाइमेट एजेंडा की निदेशक एकता शेखर ने कहा कि रिपोर्ट में यह बताया गया है कि अफ्रीका और एशिया महादेश के राष्ट्रों में वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा संकट है। इसमें भारत, नेपाल, नाइजर, क़तर, नाइजीरिया, इजिप्ट शीर्ष 6 प्रदूषित देश हैं, जबकि बांग्लादेश और पाकिस्तान को क्रमशः नौवां और दसवां स्थान मिला है।

भारत में एक लाख बच्चों की मौत

वायु प्रदूषण जनित बीमारियों और उनसे होने वाली मौतों के आंकड़ों के बारे में रिपोर्ट के हवाले से एकता शेखर ने बताया 'अफ्रीका और एशिया के देशों में खराब हवा के कारण वर्ष 2019 में 5 लाख से अधिक नवजात बच्चों की मौत अपने जन्म से एक माह के भीतर हो गयी। एक माह की उम्र पूरा करने से पहले ही वायु प्रदूषण जनित बीमारियों से वर्ष 2019 में अकेले भारत में ही एक लाख से अधिक बच्चों की मौत हुई। पूरी दुनिया में इन बीमारियों से कूल 67 लाख मौते हुईं, जिन्हें वायु प्रदूषण का स्तर कम कर के बचाया जा सकता था। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में असमय/अकाल मौतों का सबसे बड़ा कारण अब वायु प्रदूषण जनित बीमारियां ही हैं।'

फेफड़ों पर कोविड-19 का गहरा असर

क्लाइमेट एजेंडा की निदेशक एकता शेखर ने बताया कि जीबीडी रिपोर्ट यह भी बताती है कि वायु प्रदूषण से पहले से ही कमजोर हो चुके भारतीय जनता के फेफड़ों पर कोविड 19 का गहरा असर पड़ने की आशंका है।

Note : जीबीडी द्वारा जारी रिपोर्ट को विस्तार से https://www.stateofglobalair.org/  वेबसाइट पर पढ़ा जा सकता है।

रविवार, 6 सितंबर 2020

Black Spots : यूपी में ये हैं जानलेवा मार्ग, यहां होते हैं सबसे ज्यादा हादसे

 


- उत्तर प्रदेश की सड़कों पर 495 Black Spots चिन्हित

- संभल कर करें ड्राइविंग, जरा सी असावधानी दुर्घटना का सबब बन सकती है

- सभी ब्लैक स्पॉट को सुधारने के लिए कार्ययोजना तैयार कर रहा है पीडब्ल्यूडी

लखनऊ. ड्राइविंग करते वक्त बेहद शानदार रहें। आपकी जरा सी असावधानी दुर्घटना का सबब बन सकती है। उत्तर प्रदेश की सड़कों पर करीब 500 डेथ प्वाइंट हैं, जहां आये दिन होने वाले हादसों में लोग जान गंवाते रहते हैं। यूपी की विभिन्न सड़कों पर 495 'ब्लैक स्पॉट' (Black Spots)चिन्हित किये हैं, जहां अब तक 10 या उससे ज्यादा लोग हताहत हो चुके हैं। पीडब्ल्यूडी के मार्गों पर पर चिन्हित ब्लैक स्पॉट में अधिकांश वो जंक्शन प्वाइंट हैं, जहां कोई ग्रामीण मार्ग (एमडीआर) किसी स्टेट हाईवे या प्रमुख जिला मार्ग से आकर मिलता है। कुछ हादसे संकरी पुलिया के कारण भी होते हैं। पीडब्ल्यूडी ने प्रदेश के सभी ब्लैक स्पॉट को सुधारने के लिए कार्ययोजना तैयार कर रहा है।

ब्लैक स्पॉट उन स्थानों को चिन्हित किया जाता है, जहां एक ही दुर्घटना में 10 या उससे अधिक लोगों की मौत हुई है या फिर इतने ही ही लोग गंभीर रूप से घायल हुए हों। इसके अलावा उन स्पॉट्स को भी ब्लैक स्पॉट कहा जाता है, जहां बीते तीन वर्षों में अलग-अलग समय पर हुए हादसों में 10 या उससे अधिक लोग हताहत हुए हों।

इन स्थानों पर होने वाले हादसों को रोका जा सके इसके लिए पीडब्ल्यूडी दीर्घकालीन कार्ययोजना तैयार कर रहा है। पीडब्ल्यूडी अफसरों का कहना है कि अल्पकालीन उपाय के तौर पर रंबल स्ट्रिप (स्पीड ब्रेकर) और साइनबोर्ड की व्यवस्था की गई है। वहीं, स्थायी हल के लिए ब्लैक स्पॉट वाली मोड़ों को सीधा करना और संकरी पुलिया को चौड़ी करने की योजना पर काम किया जा रहा है।

इन मार्गों पर सबसे ज्यादा ब्लैक स्पॉट

लोक निर्माण विभाग में उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के इटावा-मैनपुरी मार्ग, अलीगंज-सोरो मार्ग, इलाहाबाद-गोरखपुर मार्ग, उन्नाव-कानपुर मार्ग, कासगंज-अतरौली मार्ग, गोरखपुर-देवरिया-बलिया मार्ग, जीटी रोड, तम्बौर-महमूदाबाद मार्ग, दातागंज-समरेर-बल्लिया मार्ग, दिल्ली-बरेली-लखनऊ मार्ग, दिल्ली-मेरठ पुराना राष्ट्रीय मार्ग-58, पलिया-लखनऊ मार्ग, पीलीभीत-बरेली-मथुरा-भरतपुर मार्ग, पीलीभीत-बरेली शहरी भाग, बहराइच-फैजाबाद-आजमगढ़ मार्ग, बहराइच-सीतापुर मार्ग, बिलराया-पनबाड़ी मार्ग, बुलंदशहर-सियाना-गढ़ मार्ग, मुरादाबाद-फर्रुखाबाद मार्ग, रिंग मार्ग कानपुर मार्ग से रायबरेली मार्ग, लखनऊ-बलिया मार्ग, लखनऊ-बांगरमऊ-बिल्हौर मार्ग, लिपुलेख-भिंड मार्ग, शिकोहाबाद-भोगांव मार्ग, हमीरपुर-राठ-मझगवां आदि मार्गों पर सबसे ज्यादा ब्लैक स्पॉट हैं।

शुक्रवार, 21 अगस्त 2020

Sonu Sood : दि रियल हीरो...

 


- Corona Epidemic के दौरान लोगों के लिए मसीहा बनकर उभरे हैं Sonu Sood

- एक दिन में 41,000 से ज्यादा लोगों ने मांगी सोनू सूद से मदद

- बिना जाति-धर्म देखे सबकी कर रहे बेझिझक मदद, विदेशों से भी आ रहे हेल्प मैसेज


'खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बन्दे से खुद पूछे कि बता तेरी रज़ा क्या है'... उर्दू शायर अल्लामा इकबाल की पंक्तियां Sonu Sood पर बिल्कुल फिट बैठती हैं। Corona Epidemic के दौरान सोनू सूद लोगों के लिए मसीहा बनकर उभरे हैं। इस दौरान जिस किसी ने उनसे मदद मांगी, जाति-धर्म देखे बिना सोनू ने बेझिझक सबकी मदद की। बहन के ऑपरेशन के लिए पैसे नहीं हैं? बाढ़ सब बहा ले गई है? कहीं फंसे हैं? या कोई और दिक्कत है? बिना किसी स्वार्थ के वह सबकी मदद कर रहे हैं। लॉकडाउन में फंसे लोगों को जब कोई उम्मीद नहीं दिखी तो सोनू सूद ने उनकी मदद की। जररूत के मुताबिक, उन्हें बसों-गाड़ियों और हवाई जहाज से भेजा। भूखों को खाना खिलाया। बीमारों के इलाज में मदद की। और वह सबकी मदद कर रहे हैं। लोगों को भरोसा है सरकार और रिश्तेदार भले न सुनें, लेकिन सोनू सूद मदद जरूर करेंगे।

हाल ही में सोनू सूद ने एक आदिवासी बच्ची की मदद करने का एलान किया है। एक आदिवासी लड़की का वीडियो शेयर करते हुए दरअसल, ट्विटर पर यूजर ने लिखा था कि बाढ़ में अंजली का घर लगभग जमींदोज हो गया। नेस्तानाबूद हुए घर को देखकर तो नहीं मगर बांस की बनी टोकरी में रखी हुईं अपनी भीगी हुई पुस्तकों को देख इस बच्ची के आंखों में आंसू आ गए। किसी आदिवासी बच्ची में ऐसा पुस्तक प्रेम मैंने पहली बार देखा। सोनू सूद से मासूम की आखों में आंसू नहीं देखे गये। उन्होंने रिप्लाई करते हुए लिखा- 'आंसू पोंछ ले बहन, किताबें भी नई होंगी, घर भी नया होगा।' सिर्फ यह बच्ची ही नहीं सोनू सूद अब तक लाखों की मदद कर चुके हैं।

ट्विटर, फेसबुक, हेल्पलाइन, ई-मेल, इंस्टाग्राम पर तमाम लोग सोनू सूद मदद मांग रहे हैं। वह हर किसी की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मदद मांगने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है। आलम यह है कि एक दिन में 41 हजार से ज्यादा लोगों ने उनसे मदद मांगी। मदद मांगने वालों में विदेशों से भी हैं। लोगों को अपने करीबियों से ज्यादा सोनू से उम्मीदें हैं। वह भी दिल खोलकर मदद कर रहे हैं। सोचिए, इतने लोगों की मदद कर पाना अकेले सोनू के बस की बात नहीं, लेकिन वह मुस्कराकर सभी की मदद कर रहे हैं। इतना ही नहीं वह माफी भी मांगते हैं कि अगर किसी वजह से मैसेज न पढ़ पाये हों। 

फिल्मों धाकड़ विलेन का धाकड़ रोल निभाने वाले सोनू सूद रियल लाइफ में असली हीरो हैं। ऐसे समय में जब कोई किसी को बिना स्वार्थ के 'भूनी भांग' तक नहीं देता, जिंदगी की गाढ़ी कमाई वह दोनों हाथों से लुटा रहे हैं। एक ट्विटर यूजर ने कहा कि 'बस इतना क़ामयाब होना है कि सोनू सूद सर जैसे सबकी मदद कर सकूं। इस ट्वीट पर सोनू ने रिप्लाई करते हुए लिखा- 'कामयाब होकर मदद नहीं की जाती भाई.. मदद करने से कामयाब होते हैं।' 

कहते हैं कि 'परसत मन मैला करे सो मैदा जलि जाय..' सच में कामयाबी और मदद का कोई लेना देना नहीं हैं। किसी की मदद करना बड़े दिल की बात होती है। घर भरा होने पर भी लोग भिखारियों को भगा दिया करते हैं। आज अगर देश के कामयाब लोगों में से 10 फीसदी भी सोनू सूद की तरह दूसरों की मदद करें तो तस्वीर बदलते देर नहीं लगेगी। लेकिन इसके लिए जरूरी है सच्चा सेवा भाव। वरना आप सबको युधिष्ठिर की राजसूय यज्ञ और सुनहले नेवले वाली कहानी तो याद ही होगी...