सोमवार, 23 जनवरी 2012

जयपुर मैराथन

मैने पहली बार किसी मैराथन में डरते-डरते भाग लिया था वो भी हैदराबाद मैराथन में । मुझे पता नहीं था कि मैं दौड़ भी पाउंगा या नहीं, क्योंकि मैने नेट पर देखा था हैदराबाद मैराथन में देश-विदेश से आये कई एथिलीटों ने रजिस्ट्रेशन करवाया हुआ था ।मुझे ऑफिस के बाद इतना समय नहीं मिलता है कि किसी प्रकार से तैयारी कर सकूं,एक तो 11 घंटे ऑफिस के लिए ऊपर से अलग-अलग शिफ्टों का झंझट ।मेरे टाइम मैनेटमेंट की इस समस्या को मेरे वो साथी आसानी से समझ सकते हैं जो यहां काम कर रहे हैं या कर चुके हैं । फिर भी मैने जैसे-तैसे थोड़ा समय निकाल  ही लेता था क्योंकि मैने ठान लिया था कि मुझे दौड़ना है भले मैं निर्धारित दूरी तय न कर सकूं,फिर भी हिस्सा जरूर लूंगा, और इसमें मेरा साथ दिया मेरे सीनियर,रूम पार्टनर संतोष पंत ने ।
खैर वो दिन आ ही गया जब मुझे दौड़ने जाना था,मैने नेट पर ही रनिंग रूट देख लिया था ।एक दिन पहले ही ऑफिस जाकर मैंने बीआईबी नंबर और किट ले लिया था ।दौड़ चौमहला पैलेस से होकर कुतुबशाही तक जानी थी,चौमहला पैलेस तक ले जाने के लिए आयोजकों ने सुबह 3 बजे ही बस भेज दिया था जो हमें गंतव्य स्थान तक लेकर गयी थी ।जब मैं वहां पहुंचा तो शानदार आयोजन व्यवस्था के देखकर दंग रह गया ।क्या शानदार आयोजन था जिसमें देश-विदेश से आये प्रतिभागियों के लिए कई जगह फ्रूट,जूस,टी,काफी,वाटर आदि के काउंटर लगे हुए थे ।  मध्यम-मध्यम ध्वनि में मधुर-मधुर विदेशी संगीत बज रहा था । चौमहला पैलेस को चारों तरफ से अच्छी तरह से सजाया गया था । हर तरफ खूबसूरत देशी-विदेशी युवक-युवतियां वार्मअप करते हुए दिखाई दे रहे थे,वहां पहुंचकर मैने सोचा मैने सोचा कि मैं दौड़ पाउँ या न कम से कम ऐसी प्रतियोगिता में पार्टिसिपेट ही किया । क्योंकि मैं उन प्रोफेशनल प्रतिस्पर्धियों  के मुकाबले अपने को कहीं भी नहीं पा रहा था ।
दौड़ सुबह 6 बजे से शुरू होनी थी ठीक 5.30 पर माइक से एनाउंस हुआ कि सभी लोग वार्मअप करने के लिए मंच के सामने आ जाएं । वार्मअप करीना के छम्मकछल्लो गाने की पार्श्व ध्वनि के साथ माईक के सहारे एक खूबसूरत सी पूर्व एथलीट(धावक) करवा थी । रनिंग ठीक छह बजे शुरू हो गयी,सारे लोग हमसे आगे-आगे भागने लगे मैने सुन रखा था कि मैराथन में धीरे-धीरे ही भागना चाहिए । मेरे पास कोई अनुभव तो था नहीं मैं बस उसी को फालो किये जा रहा था । लेकिन एक चीज जो मुझे रोमांचित किये जा रही थी वो थी आयोजन कमेटी की व्यवस्था । हर एक किलोमीटर पर पानी और हर दो किलोमीटर बाद फ्रूट,सॉफ्ट ड्रिंक,जूस आदि की वयव्स्था थी वो भी खड़े सदस्य हौंसला बढ़ाते हुए हाथ में सामग्री लिए दौड़ते हुए आप तक पहुंचा रहे थे । केवल इतना ही नहीं ट्रैफिक व्यवस्था को इस कदर हैंडिल किया गया था किसी प्रकार से धावकों को कोई परेशानी न हो । हर पांच किलोमीटर पर आला दर्जे के प्राथमिक उपचार की भी व्यवस्था थी और धावकों के साथ एंबुलेंस की गाड़ियां पेट्रोलिंग करती नजर आ रहीं थीं ताकि किसी आपात स्थिति से निपटा जा सके
सबसे मजेदार बात यह थी कि हर चौराहे और रास्ते पर लोग सड़क के किनारे  खड़े होकर प्रतिभागियों का हौंसला आफजाई कर रहे थे, खासकर ट्रैफिक और आंध्रा पुलिस के जवान तालियां बजाते हुए हौंसला बढ़ा रहे थे ।
मुझे पता नहीं चला कि मैने कब दौड़ पूरी कर ली वो श्रेष्ठ 20 धावकों में से आया था । मैं बहुत खुश था मेरी खुशी बिल्कुल वैसी ही थी जैसे एक कमजोर छात्र अच्छे नंबरों से पास हो जाए ।
गणमान्य व्यक्तियों द्वारा पुरस्कार वितरण का समय आ गया, शीर्ष दस विजेताओं को नगद पुरस्कार भी दिया जाना था,मुझे एक मैडल और सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया । मैं बहुत खुश था हमें घर तक छोड़ने के लिए बसों की भी वयवस्था थी ।
आप परेशान न हों मैं मेन मुद्दे की तरफ ही आ रहा हूं लेकिन मुझे लगा कि बिना इस आयोजन की बात किये हम जयपुर मैराथन की बात नहीं कर सकते ।
कुछ दिन बाद मुझे पता चला कि जयपुर में भी मैराथन दौड़ आयोजित की जा रही है, मैने सोचा मैं भी भाग लूंगा क्योंकि मेरे हौंसले पहले से ही बुलंद हो चुके थे,मुझे लग रहा था कि मैं भी दौड़ पाउंगा। दौड़ बाईस जनवरी को आयोजित होनी थी लेकिन मैं चाहकर भी इसमें भाग नहीं ले सकता था क्योकि फरवरी में मेरी छोटी बहन की शादी में मुझे घर जाना था बार-बार छुट्टी कैसे मिल पाती । मेरा कार्यक्षेत्र राजस्थान ही था इसलिए बड़ी लालसा थी जयपुर जाने की और दौड़ने की,क्योंकि एक बार पहले भी मैं जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भाग लेने के लिए जा चुका था और मुझे जयपुर शहर काफी पसंद आया था । मैने अपने मन को जैसे-तैसे समझा लिया और सोचा ऑफिस में ही फीड़ देख लूंगा ।
जयपुर को वर्ल्ड क्लास सिटी बनाने का संदेश लेकर सुबह 8 बजे रामनिवासबाग से शुरू हुई जयपुर मैराथन ने देशी और विदेशी एथलीटों को बहुत निराश किया । हॉफ मैराथन में शामिल हुए धावकों के सुबह 7 बजे से ही कड़ाके की सर्दी में कपड़े खुलवा कर खड़ा कर दिया गया,वॉलीवुड स्टारों के आने के इंतजार में इन्हे 8.10 मिनट रवाना किया गया । पहले 4 किमी तक केवल पानी की व्यवस्था की गई थी लेकिन बाकी सत्रह किमी. तक धावकों को पानी भी नसीब नहीं हुआ बेचारे बिना पानी के ही दौड़ते रहे ।इसके साथ ही रास्ते में मैराथन के दौरान कई रिक्शा चालक और ऑटो चालक नजर आये जिसके कारण धावकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा ।
इन सबसे तंग आकर प्रतिभागियों ने मंच के सामने करीब दस मिनट तक हाय-हाय के नारे लगाकर जयपुर को मैराथन के सहारे वर्ल्ड क्लास सिटी बनाने के सपने पर सवाल खड़ा कर दिया । धावकों ने आरोप लगाया कि पदक योग्यता के अनुसार नहीं दिए गये,और तो और सबसे पहले दौड़ पूरी करने वालों को यह कह दिया गया कि कार्यालय पर आ जाना,  वहां पदक मिलेगा ।
ऐसा आयोजन देखकर मुझे लगा कि चलो मैं नहीं गया तो ही अच्छा था वरना ऐसी अव्यवस्था ......
मुझे अकस्मात ही हैदराबाद मैराथन के शानदार आयोजन की याद आ गई क्या आयोजन था,जहां एथलीटों की सुविधा का खास ध्यान रखा गया था,वहीं जयपुर में मैराथन का आयोजन बाप रे ।
क्या जरूरत है ऐसे आयोजनों की जिसमें आप उचित व्यवस्था नहीं कर सकते, ऐसे कैसे आप वर्ल्ड क्लास बन सकते हो ।
मैं आशा करता हूं कि अगर अगली बार आयोजन होगा तो इन सारी कमियों को दूर कर लिया जाएगा ताकि अधिक से अधिक प्रतिभागी आ सकें और सच में हम वर्ल्ड क्लास सिटी की तरफ मजबूती से कदम बढ़ायें ।











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